Monday, June 21, 2021

योग दिवस के मौके पर शुरू करे सूर्य नमस्कार--मिलेंगे कई फायदे

 


आज जब पूरी दूनिया में कोरोना से लोग परेशान है और इस बिमारी ने लाखों लोगों को जान ली है..दूनियाभर के वैज्ञानिक इस बीमारी पर काबू करने के लिए लगातार प्रयोग कर रहें हैं...वैसे वैक्सिन लगाकर आपर कोरोना पर नियंत्रित कर सकते है.. लेकिन लंबे समय से इस बिमारी से बचने के लिए आपको योग का सहारा चाहिए...योग सभी के जीवन के लिए बहुत जरूरी है। 

योग में सूर्य नमस्कार का अलग ही महत्व है. सूर्यनमस्कार का मतलब “सूर्य को नमस्कार करना” । यह योगासनों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे करने से शरीर रोग मुक्त होता है तो मानसिक तौर पर व्यक्ति सबल होता है... इसे आप योग के तौर पर या एक्सरसाइज के तौर पर भी कर सकते हैं..योग के तौर पर कहने का मतलब धीरे-धीरे अभ्यास करना और गति के साथ करते हैं तो ये एक्सरसाइज हो जाता है..ये  घर में भी हो सकती है, जब आपके पास बाहर पार्क में जाने का ऑप्शन ना हो इसमें आपको सिर्फ एक योगा मैट या कंबल बिछाकर आप सूर्य नमस्कार कर सकते हैं। 

कितने समय तक करें

हर रोज इसे 5-10 मिनट तक किया जा सकता है इसे करने के बाद आपको और कुछ करने की आवश्यकता रह जाती है.. सूर्यनमस्कार में कुल 12 आसन के पोज़ होते हैं । इसे 5 राउंड से लेकर 10 राउंड तक किया जा सकता है..लेकिन थकावट नहीं हो तो इसे बढ़या भी जा सकता है..

कैसे और कौन करें-

यदि युवा वर्ग है तो इसे गति के साथ के कीजिए ताकि आपके काफी अच्छा लगे..लेकिन जो लोग कमजोर या अधिक उम्र के  है वो धीरे-धीरे करें ताकि आपके शरीर में दर्द नहीं हो..बच्चे लोग भी इसे गति के साथ करें तो काफी लाभ मिलता है.

शरीर के किस चक्र को प्रभावित करता है?

हमारे देश में इतिहास और विज्ञान को जोड़कर देखते है तो पता चलता है कि सूर्य नमस्कार करने के कई फायदे है. प्राचीन समय में हमारे त्रृषि-मुनि द्वारा कहा जाता था कि शरीर को चलाने वाले विभिन्न अंग, अलग अलग देवताओं के द्वारा संचालित होते हैं। जबकि विज्ञान के नज़रिए से पता चला है कि शरीर के हर अंग को चलाने के लिए एक दिव्य ऊर्ज की जरूरत होती है। इसी तरह हमारी नाभि के पीछे ही होता है मणिपुर चक्र। यह चक्र सूर्य से संबंधित और इसे मानव शरीर का केंद्र भी कहा जाता है। 

इसके करने  के क्या फायदे है-

-सूर्य नमस्कार रोज करने से उसकी रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान बढ़ता है

-तनाव दूर करने में सूर्य नमस्कार काफी लाभदायक है

-नींद ना आने की समस्या में भी ये फ़ायदेमंद है

-रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में भी काफी मददगार है

-यह पाचन क्रिया को बेहतर करता है 

-वजन कम करने में ये लाभकारी है

-सूर्यनमस्कार शरीर को काफी लचीला बनाता है

-एकाग्रता बढ़ाने में भी मददगार है

-पीरियड्स को रेग्युलर करने, हैवी ब्लीडिंग या कम ब्लीडिंग को सही करने में भी मददगार है

-गुड हार्मोन्स का स्त्राव बढ़ता है

-डिटॉक्स करने में मिलती है मदद

 -रोज़ करने से, आप 1 दिन में 400 से भी अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं

-बैली को एक शेप प्रदान करता

-चेहरे पर झुर्रियां नहीं आती और स्किन भी ग्लो करती है। इसे करने से ब्लड सरकुलेशन अच्छा रहता है

-सेक्सुअल फंक्शन में भी सुधार करता है

Friday, March 19, 2021

पानी पीने के यह तरीका आपके वजन को करेगा कम



आधुनिक समय में हमारे जीवन में रहन-सहन के साथ-साथ खान-पान में भी काफी परिवर्तन हुआ है। हम सब हर दिन जाने या अनजाने में कुछ न कुछ जंक फूड का सेवन करते हैं। जंक फूड के चलते  हमारे शरीर में काफी टॉक्सिन जमा हो जाते हैं। जिसका हमारे शरीर पर काफी बुरा प्रभाव पड़ता है। लेकिन डिटॉक्स वाटर से आप अपने शरीर की सफाई कर सकते हैं।

डिटॉक्स वाटर कैसे हमें स्वस्थ्य रखता है?

हमलोग जानते हैं कि अधिक मात्रा में पानी का सेवन करने से वजन कम करने में मदद मिलती है और यही बात डिटॉक्स वाटर पर भी लागू होती है। हम सभी जानते हैं कि पानी शरीर के विषाक्त  पदार्थों को बाहर निकालता है। अगर आप डिटॉक्स वाटर ले रहे हैं तो आपके पाचनतंत्र में सुधार होता है, वजन घटाने में मददगार साबित होता है, प्रतिरक्षा तंत्र की रक्षा करने में मददगार है साथ ही त्वचा  को स्वस्थ्य रहने में काफी असरदार है। 

डिटॉक्स वाटर बनाने के लिए क्या चाहिए?

आप अपने घर में रखे फल और सब्जियों से ही डिटॉक्स वाटर बना सकते हैं.. अलग-अलग दिन आप अलग अलग फ्लेवर का डिटॉक्स वाटर बना सकते हैं इसके लिए आपको नींबू, पुदीना, अदरख,  सौंफ, मौसमी, नींबू, खीरा, तुलसी, करी पत्ता, गाजर, बेसिल सिड्स, दालचीनी आदि की जरूरत होगी..लेकिन ये सब एक साथ जरूरत नहीं पड़ेगी। आप पूरे सप्ताह नए स्वाद का आनंद ले सकते हैं। 

डिटॉक्स वाटर बनाने की विधि-

डिटॉक्स वाटर बनाने के लिए आप एक बड़ी बोतल में पानी भर लें. फिर आप नींबू के छोटे-छोटे टुकड़े, खीरा के छोटे-छोटे टुकड़े और पुदीना के 10-15 पत्ते को डाल दीजिए और दो से तीन घंटे के लिए  छोड़ दें. फिर आप इस पानी को पीते रहिए..अगर बोतल का पानी खत्म हो जाए तो फिर भर सकते हैं.. दूसरे दिन दूसरी साम्रगी को मिलाकर डिटॉक्स वाटर तैयार कीजिए..

सप्ताह में अलग-अलग दिन के लिए डिटॉक्स वाटर- 

सोमवार--नींबू, खीरा, पुदीना

मंगलवार-गाजर, नींबू, करी पत्ता

बुधवार--सेव, अदरख, दालचीनी

गुरुवार--ग्रीन टी, नींबू, पुदीना

शुक्रवार-खीरा, तुलसी, बेसिल सीड्स यानी तुलसी के बीज

शनिवार--पुदीना, अदरख, नींबू

रविवार-संतरे और स्ट्रॉबेरीज

Saturday, February 20, 2021

अच्छी नींद = अच्छी सेहत

 अच्छी नींद कैसे हो-

हमारी रोजमर्रा की जिंदगी में  नींद एक जरूरत है..नींद हमारे शरीर और मस्तिष्क को आराम देने की एक प्रक्रिया है ताकि शरीर और मन ऊर्जा का संग्रह कर ले,  ताकि आप आगे के काम के लिए तैयार हो जाएं। इसलिए अच्छी और गहरी नींद के बाद आप काफी ऊर्जावान महसूस करते हैं...अगर किसी कारण से ये नींद पूरी नहीं होती है तो आप परेशान, चिड़चिड़े, आलस्य, और कमजोरी जैसी कई समस्याओं के आप शिकार हो जाते हैं..

वैसे देखा जाए तो अनिद्रा कोई बीमारी नहीं है। यह एक जीवनशैली है। प्रकृति ने हमें इस प्रकार बनाया है कि हम आठ घंटे कठोर श्रम करें ताकि फिर आठ घंटे सोने के अधिकारी हो सके। लेकिन आधुनिक समाज में हम सब में श्रम करने की क्षमता कम हो गई है जिस कारण से नींद भी कम आ रही है..क्योंकि जैसे-जैसे हमारा समाज समृद्ध होता है मेहनत कम करना पड़ता है जिसके चलते हमसब के जीवन से नींद भी कम होने लगती है। यदि हम गौर से देखे तो हम पाते हैं कि गरीब लोगों में अनिद्रा की शिकायत नहीं है क्योंकि उन्हें कुछ पाने के लिए श्रम करना पड़ता है..वहीं अमीर लोग श्रम से दूर होते चले जाते हैं और वो अनिद्रा के शिकार हो जाते हैं। इसलिए तो प्रचलित कहावत है -  भिखारियों को सम्राटों से बेहतर नींद आती है। 

अनिद्रा के लक्षण- 

-सोने की कोशिश करने पर भी नींद न आना।

-नींद आने पर भी थोड़ी देर में जागना या बार-बार नींद टूटने की शिकायत होना

-नींद से उठने के बाद भी खुद को ताजा महसूस नहीं करना और सुस्ती आना

-व्यक्ति खुद को अस्वस्थ महसूस करता है 

-अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्ति हमेशा चिड़चिड़ा रहता है और  बहुत जल्दी गुस्सा हो जाता है

-अनिद्रा से ग्रस्त व्यक्ति को चिंता और अवसाद जैसी समस्याएं जल्दी घेर लेती है। 

कम नींद के दुष्प्रभाव-- 

-गहरी नींद नहीं होने से हम तनाव और मानसिक रोग के शिकार होते हैं

-नींद पूरी नहीं होने से शरीर और दिमाग को आराम नहीं मिलता है जिससे बदन दर्द, अकड़न और थकावट जैसी परेशानी पैदा हो जाती है। 

-अच्छी नींद नहीं होने पर पाचन तंत्र पर असर पड़ता है जिसके चलते कब्ज की समस्या होती है। 

-पूरी नींद न लेने पर व्यक्ति किसी भी कार्य में एकाग्रचित्त नहीं हो पाता और उसकी स्मरणशक्ति कमजोर हो जाती है।

-नींद कम होने से व्यक्ति चिड़चिड़ा हो जाता है जिसके चलते छोटी-छोटी बातों पर भी क्रोधित हो जाता है..जिसके चलते परिवार, समाज और ऑफिस में भी लोग उससे बात करने में संकोच करते हैं।

-नींद के अभाव के चलते थकान बनी रहती है और सिर हमेशा भारी रहता है। 

-कम सोने वालों में कईं बार वजन बढ़ने की समस्या भी उत्पन्न हो जाती है। 

अच्छी नींद के फायदे- 

-अच्छी नींद आने से आप ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल आदि से समस्या से बच सकते हैं। 

-अच्छी नींद आने के बाद आप काफी फ्रेश और किसी भी काम में आप मजा लेते हैं. 

-पर्याप्त नींद के बाद आप काफी ऊर्जावान महसूस करते हैं। 

-पूरी नींद लेने वाले व्यक्तियों की याद्दाश्त काफी अच्छी होती जाती है। 

-अच्छी नींद होने से आपकी एकाग्रता भी बढ़ती है।

-हमेशा पर्याप्त नींद लेने से व्यक्ति हमेशा तरो-ताजा महसूस करता और उसके चेहरे पर नेचुरल मुस्कान बनी रहती है।


अच्छी नींद आए इसके लिए क्या करें-

1-आसन में आप सूर्य नमस्कार, पर्वातासन, वज्रासन, दंडासन कर सकते हैं.

2- हर दिन आप कम से कम 30 मिनट तेज गति से टहले..ध्यान रहे टहते समय किसी से बात या गाना नहीं सुने। 

3-अगर आपको किसी खेल का शौक है तो समय निकालकर रोज जरूर खेलिए।

4-कोशिश कीजिए की आप हर दिन कुछ न कुछ श्रम करें.

5-अंत में आप जब बिस्तर पर सोने जाएं तो एक प्रयोग कीजिए-

आप सिर के नीचे से तकिए हटाकर लेट जाए..दोनों पैर के बीच में एक फीट का फासला रखें..दोनों हाथ बगल में रखें और हथेलियों को छत की ओर रखें..आंखें बंद रखें। योग में इसे शवासन कहते है यानि शरीर मुर्दे जैसी..आपके शरीर में कोई हलचल नहीं हो। ध्यान रहे कि आप अंदर से कुछ भी ताकत नहीं लगाए..ये भी मत कीजिए की हमें सोना है..क्योंकि इस सोच में भी ताकत लगानी होती है...अब बस आप मन से अपने श्वास को देखते रहिए कि आपके अंदर श्वास आ रही है, जा रही है...ध्यान रहे सिर्फ मन से देखना है..करना कुछ भी नहीं। अगर आपका ध्यान कुछ देर बात भटक जाता है तो आप परेशान मत हो... फिर से श्वास को देखें..बार बार मन इधर-उधर भटकेगा लेकिन फिर उसे वापस देखने के काम में लगा दीजिए। फिर आपको पता भी नहीं चलेगा कि कब आप सो गए...


आपको शुरू में करने में परेशानी होगी लेकिन ये अभ्यास है...करते करते आप पाएंगे कि कब नींद आ गई पता भी नहीं चला। तो चलिए इसे कीजिए और रात में आप अच्छी नींद का आनंद लीजिए। 

Thursday, January 28, 2021

नए ज़माने की फसल-स्ट्रॉबेरी..


लक्ष्य कितना भी बड़ा हो... लेकिन संकल्प दृढ़ हो तो पत्थर पर भी पेड़ उगाए जा सकते हैं... कुछ ऐसा ही नजारा बिहार के भोजपुर में देखने को मिल रहा है... जहां स्ट्रॉबेरी की खेती की जा रही है...


पारंपरिक खेती से हटकर-

किसानों ने हाल के दिनों में पारंपरिक खेती से ऊपर उठकर व्यवसायिक खेती को भी अपनाना शुरु कर दिया है.... भोजपुर जिले में जहां कल तक अन्य प्रांतों में उपजे स्ट्रॉबेरी का स्वाद लोग चखने थे..वहां अब भोजपुर जिले में उत्पादित स्ट्रॉबेरी का स्वाद ले रहे हैं...पूर्व सांसद आर के सिन्हा बहियारा स्थित अपने पैतृक गांव में जैविक विधि से... स्ट्रॉबेरी की खेती करा रहे हैं... जिसका मकसद किसानों की आय को बढ़ाना तो है ही... साथ ही स्वस्थ समाज भी बनाना है.....यह स्ट्रॉबेरी पूरी तरह जैविक कृषि से तैयार है... और इसकी मांग राजधानी पटना के अलावा आसपास के जिलों में सबसे ज्यादा है...



किसानों को अच्छी आमदनी-

फार्म के केयरटेकर धर्मेंद्र पांडे बताते हैं कि... बहियारा में तैयार हुई स्ट्रॉबेरी की क्वालिटी बहुत ही बेहतर है......उन्होंने बताया कि एक पेड़ को लगाने की कीमत करीब ग्यारह रुपये आती है... और एक पौधे में लगभग दो किलो स्ट्रॉबेरी के तैयार फल निकलते हैं...जिसे व्यापारियों को 600 से 700 रुपये प्रति किलो बेच दिया जाता है..


प्रतिरोधक क्षमता बढ़ाने में मददगार-

स्ट्रॉबेर्री इम्मयूनिटी सिस्टम को बढ़ाने और रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने वाला एक दुर्लभ फल है... जिसकी मांग पूरी दुनिया में तेजी से बढ़ रही है..यही कारण है कि मौसम अनुकूल ना होने के बावजूद.. भोजपुर में जैविक विधि से हो रही स्ट्रॉबेरी की खेती की चर्चा बिहार में खूब हो रही है....


Wednesday, January 27, 2021

भोजपुरी के शेक्सपियर-भिखारी ठाकुर

भोजपुरी के शेक्सपियर कहे जाने वाले भिखारी ठाकुर की टोली में रंगमंच पर नाट्य कला का जादू बिखेरने और लौंडा नाच की परंपरा शुरु करने वाले शख्स रामचंद्र मांझी को इस बार पद्मश्री सम्मान मिला.. जिसके बाद एक बार फिर भिखारी ठाकुर की नाटक मंडली चर्चा में हैं.. 



भिखारी ठाकुर की मंडली का आखिरी लौंडा

भिखारी ठाकुर की नाच मंडली के आखिरी लौंडा रामचंद्र माझी.. जब मंच पर भिखारी ठाकुर के नाटक विदेशिया का मंचन करते हैं... तो लोगों को एहसास नहीं होता कि... इस उम्र में भी ऐसी कला का प्रदर्शन किया जा सकता है... लौंडा नाच की परंपरा की शुरुआत रामचंद्र मांझी ने हीं की थी.... विदेशिया नाच बिहार में उस वक्त शुरू हुई थी.. जब बिहार भुखमरी और बेरोजगारी से जूझ रहा था....लोग रोजगार की तलाश में बाहर जाते थे... और पत्नियां घर पर रहती थीं.... महिलाओं के विरह की कहानी को विदेशिया के रूप में भिखारी ठाकुर ने मंच पर लाया था.... नाटक इतना मशहूर हुआ और देश-विदेश में इतनी ख्याति मिली... जो देशव काल की सीमा को लांघ गई.. लेकिन धीरे-धीरे इस नाटक के कलाकार लुप्त होते गए... और अब तो एकमात्र कलाकार रामचंद्र मांझी बच गए... जिन्हें अब सरकार पद्मश्री सम्मान देने जा रही है....रामचंद्र मांझी के बाद इस कला की सेवा करने वाला कोई कलाकार नजर नहीं आ रहा.... खुद रामचंद्र माझी मानते हैं कि... उस वक्त भुखमरी और बेरोजगारी के कारण लोग अपने लड़कों को इस मंडली में भेजते थे... लेकिन अब विकास हो चुका है और शिक्षा का स्तर भी काफी ऊंचा है... लिहाजा लौंडा नाच की तरफ कोई नहीं आता..


सम्मान को लेकर खुशी 

छपरा के नगरा प्रखंड के तुजारपुर के रहने वाले... रामचंद्र माझी का परिवार मिलने वाले सम्मान को लेकर काफी खुश है.... लेकिन इनके परिवार का कोई भी सदस्य इस कला से नहीं जुड़ा है... रामचंद्र माझी इस कला को बचाने के लिए ताउम्र संघर्ष करते रहे... और अपने परिवार को इससे अलग रखा... क्योंकि वे जानते थे कि इस कला का कोई भविष्य नहीं है... लोग इस कला को कला की तरह नहीं... बल्कि उपेक्षा की नजरों से देखते थे... क्योंकि हमारे समाज में पुरुषों का लौंडा बनना कहीं से जायज नहीं माना जाता था..

विरासत का आखिरी लौंडा 

94 साल के रामचंद्र माझी अभी भी मंच से जुड़े हुए हैं.... और कई जगहों पर इनके नाटकों का मंचन होता है... लेकिन आने वाले समय में भिखारी ठाकुर का लौंडा नाच और विदेशीया कहीं अतीत के पन्नों में गुम ना हो जाए... इसके लिए भी सोचना होगा... क्योंकि रामचंद्र मांझी इस विरासत के आखिरी लौंडा साबित होंगे


मुंगेर में फिर चली गोली- BJP प्रवक्ता को अपराधियों ने मारी गोली..बेहतर इलाज के लिए पटना भेजा गया

फिर दहला मुंगेर- 



आज मुंगेर में फिर बड़ी अपराध की घटना घटी..यहां पर अपराधियों ने दिनदहाड़े बीजेपी प्रवक्ता अजफर शम्सी को गोली मार दी. उन्हें गंभीर हालत में मुंगेर अस्पताल में भर्ती कराया गया है। अजफर शम्सी को जमालपुर कॉलेज के पास गोली मारी गई. गोली की आवाज सुनकर आसपास के लोग पहुंचे और उन्हें हॉस्पिटल में भर्ती कराया.  सूचना मिलने के बाद पुलिस घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच कर रही है.. फिलहाल यह अब तक स्पष्ट नहीं हो पाया है कि अपराधियों ने क्यो गोली मारी है. शम्शी के ड्राइवर के अनुसार घटना दिन के 11 बजे की है जब वो कॉलेज पहुंचे थे तभी कुछ लोगों ने उन्हें गोली मार दी.. इधर शम्सी को बेहतर इलाज के लिए पटना रेफर किया गया है..डॉक्टरों के अनुसार शम्सी के कान के पीछे भी गोली लगी है ..इधर BJP प्रवक्ता अजफर शमशी को गोली मारने के मामले में जमालपुर कॉलेज के प्रभारी प्राचार्य ललन प्रसाद सिंह गिरफ्तार कर लिया गया है..मालूम हो कि 2 दिन पहले कॉलेज का प्रभार लेने को लेकर विवाद हुआ था..वही अजफर शमशी के बयान पर SP ने ललन प्रसाद सिंह को गिरफ्तार किया है।


घटना पर दुख-

इधर भाजपा प्रदेश अध्यक्ष संजय जायसवाल ने इस मामले को लेकर डीजीपी से की बात की और इस घटना पर दुख जताया जायसवाल ने कहा कि जो भी दोषी होंगे. उनके खिलाफ कड़ी कार्रवाई होगी. 


विपक्ष ने फिर साधा निशाना-

इधर बिहार में गिरती कानून व्यवस्था को लेकर विपक्ष के नेताओं ने एक बार फिर सरकार पर निशाना साधा है.. कांग्रेस प्रवक्ता राजेश राठौर ने कहा की पहले आम लोगो पर गोली चलती थी अब तो बीजेपी प्रवक्ता को गोली मारी गई है। बिहार के लॉ एंड ऑर्डर पर सीएम का कोई कंट्रोल नहीं रह गया है। वही आरजेडी नेता मृत्युंजय तिवारी ने कहा कि बिहार में कानून व्यवस्था पूरी तरह चौपट हो गई है।

Sunday, January 17, 2021

प्रयागराज ही नहीं, इस त्रिवेणी संगम की महिमा भी अपरंपार है!

 तीन नदियों का संगम

मशहूर सोमनाथ मंदिर देखने के लिए अगर आप यहां आते हैं. तो सिर्फ ज्योतिर्लिंग का दर्शन करके वापस नहीं लौटे. यहां से कुछ ही दूरी पर त्रिवेणी घाट है. इसे तीन पवित्र नदियों का संगम कहा जाता है. कपिल, हिरण और सरस्वती नदी का मिलन होता है. और प्रकृति का मिलन तो हमेशा से खूबसूरत रहा है. शाम हो या सुबह यहां संगम किनारे बैठने में जो सुकुन मिलता है. उसका एहसास आप बहुत ही कम जगहों पर जाकर कर सकते हैं.




उद्गम स्थल की नहीं जानकारी

लोकमान्यताओं के मुताबिक तीनों नदियों यहां से समुद्र के अंतिम गंतव्य तक बहती हैं. यह मानव जन्म, जीवन और मृत्यु का प्रतीक है. स्थानीय लोगों का कहना है कि इस घाट में स्नान करने से सभी शापों से मुक्ति मिलती है और पूरे जीवन में बीमारियां नहीं होती हैं. हालांकि, ये नदियां कहां से आती हैं. इसके बारे में कोई जानकारी नहीं देता है.



भलका तीर्थ का भी करें दर्शन

धार्मिक मान्यताओं के अनुसार भगवान श्रीकृष्ण की मौत तीर लगने से हुई थी. कहा जाता है कि इसी जगह पर कृष्ण भगवान को तीर लगी थी और उन्होंने शरीर का त्याग किया था. इस मंदिर को भलका तीर्थ बोलते हैं. यहां एक प्रतिमा बनी हुई है. तीर मारनेवाला बहेलिया भगवान से माफी मांगने की मुद्रा में बैठा हुआ है. इस मंदिर में दर्शन करने के लिए हजारों की संख्या में श्रद्धालु आते हैं. 









हजारों साल पुराना पीपल का पेड़
भलका मंदिर परिसर में काफी पुराना पीपल का पेड़ है. कहा जाता है कि इसकी उम्र करीब 5 हजार साल होगी. सबसे खास बात ये है कि ये पेड़ कभी सूखता नहीं है. इसकी छांव में बैठने का सुख ही अलग है. मन शांत हो जाता है. हर वक्त यहां पर ठंडी हवा का झोंका चलते रहता है.

Thursday, January 14, 2021

बिहार के पर्यटन नक्शे पर वेणुवन और घोड़ा कटोरा

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार द्वारा नालंदा जिले के राजगीर में वेणुवन के विस्तार और घोड़ाकटोरा में नये पार्क का उद्घाटन कर इस स्थल को पर्यटन के नक्शे पर लाने की एक कोशिश है। वैसे बिहार में पर्यटन की अपार संभवानाएं है...बस जरूरत है तो इच्छा शक्ति की..ऐसा लगता है कि इसबार नीतीश कुमार जी पर्यटन को काफी फोकस कर रहे है ताकि दुनियाभर के पर्यटक बिहार आए और यहां के ऐतिहासिक, प्रकृति और समृद्ध संस्कृति विरासत को जान सकें। वैसे वेणुवन के विस्तार का काम पिछले करीब डेढ़ साल से चल रहा था. अपने राजगीर प्रवास के दौरान वेणुवन के पौराणिक और ऐतिहासिक महत्व को देखते हुए मुख्यमंत्री ने इसके सौंदर्यीकरण का निर्देश दिया था. इसका सौंदर्यीकरण करते हुए कई सुविधाओं के विस्तार के साथ-साथ एक बड़े पार्क का रूप दिया गया है.

पहले वेणुवन करीब पांच एकड़ का था, लेकिन अब यह करीब 13 एकड़ का हो गया है. आसपास के खाली पड़े एरिया को इसमें शामिल कर विस्तार किया गया है. यहां एक बड़ा मेडिटेशन सेंटर का भी निर्माण कार्य किया गया है, जहां बड़ी संख्या में बौद्धधर्मावलंबी एक साथ बैठ सकेंगे. 


वेणुवन राजगीर (नालंदा) का सबसे मनोरम एवं शांत जगह है. वास्तव में यह एक बौद्ध मठ है जिसका निर्माण राजा बिम्बिसार ने महात्मा बुद्ध को ठहरने के लिए करवाया था. यहाँ आने वाले टूरिस्ट इस जगह पर बैठ कर एक बार ध्यान जरूर लगाते






नालंदा का घोड़ा कटोरा 

घोड़ा कटोरा राजगीर के पास एक छोटा और सुंदर पिकनिक स्थल है। हिंदू पुराणों के अनुसार यहाँ राजा जरासंध का अस्तबल था, इसलिए इस जगह का नाम घोड़ा कटोरा पड़ा। यह विश्व शान्ति पगोड़ा के पास स्थित है। छोटी छोटी पहाड़ियों से घिरी यह झील बहुत सुंदर दिखाई देती है और घूमने के लिए यह एक आदर्श स्थान है। आप घोड़ागाड़ी या तांगा और साईकिल से यहाँ पहुँच सकते हैं। आप यहाँ नौका विहार का आनंद भी उठा सकते हैं। साथ ही घोड़ा कटोरा झील में भगवान बुद्ध की लगी विशाल प्रतिमा देशी-विदेशी सैलानियों को काभी लुभाती है 


अब आप भी तैयार हो जाए वेणुवन और घोड़ा कटोरा जाने के लिए..तो देरी किस बात की चलिए और मिलते हैृ.

Wednesday, January 13, 2021

मकर संक्रांति का पतंग से रिश्ता ?

 हमारे देश में मकर संक्रांति हर साल जनवरी माह में मनाया जाता है।  वैसे तो इस पर्व के मौके पर कई धार्मिक कार्य किए जाते है जिसे आपसब जानते ही  होंगे और करते भी होंगे।  लेकिन मकर संक्रांति पर पतंग उड़ाने का अलग आनंद होता है.. वैसे संक्रांति के मौके पर पतंग उड़ाने की परंपरा गुजरात में सबसे अधिक है लेकिन अब यह पूरे देश में फैल गई है।  मकर संक्रांति के मौके पर न सिर्फ हर उम्र के लोग पूरे जोश और मस्ती से पतंग उड़ाते हैं, बल्कि कई जगहों पर तो पतंगोत्सव का एक भव्य आयोजन भी किया जाता है. लेकिन बहुत कम लोग जानते हैं कि इस मौके पर पतंग क्यों उड़ाई जाती है?



स्वास्थ्य के लिए लाभदायक

मकर संक्रांति के पर्व पर पतंग उड़ाना सेहत के लिए लाभदायक है। हालांकि पतंग उड़ाने के पीछे कोई धार्मिक कारण नहीं है लेकिन फिर भी सेहत को देखते हुए इस दिन पतंग उड़ाना अच्छा माना जाता है। जनवरी में सर्दी के मौसम में लोग अपने घरों में रहना पसंद करते हैं लेकिन उत्तरायण के दिन अगर कुछ देर धूप के बैठा जाए तो इससे शरीर में कई रोगों का प्रभाव कम भी हो जाता हैं. वैज्ञानिकों के अनुसार, उत्तरायण में सूर्य की गर्मी शीत के प्रकोप और शीत के कारण होने वाले रोगों को समाप्त करने की क्षमता रखती है। ऐसे में घर की छतों पर जब लोग पतंग उड़ाते हैं तो सूरज की किरणें एक औषधि की तरह काम करती हैं। शायद इसलिए मकर संक्रांति के दिन को पतंग उड़ाने का दिन भी कहा जाता है।



मकर संक्रांति पर तिल खाने के फायदे

मकर संक्रांति का त्योंहार देश के प्रत्येक राज्य में मनाया जाता है कई जगह नाम इसके अलग हो सकते हैं लेकिन सभी जगह तिल खाने की परंपरा है। आयुर्वेद में कहा गया है कि तिल की तासीर गर्म होती है और सर्दी के मौसम में जब शरीर का तापमान गिर जाता है तो शरीर को अतिरिक्त गर्मी की जरूरत होती है। ऐसे में तिल का सेवन शरीर में गर्मी व उर्जा के स्तर को बनाए रखता है। साथ ही तिल में कॉपर, मैग्नीशियम, आयरन, फास्फोरस, जिंक, प्रोटीन, कैल्शियम, बी काम्प्लेक्स और कार्बोहाइट्रेड आदि महत्वपूर्ण तत्व पाये जाते हैं। इसके अतिरिक्त तिल में एंटीऑक्सीडेंट्स भी होते हैं जो कई बीमारियों के इलाज में मदद करते हैं। यह पाचन क्रिया को भी सही रखता है और शरीर को निरोगी बनाता है। इसलिए इस मौके पर लोग तिल भी खाते हैं। 


अब आपसब भी पतंग उड़ाए और तिल के बने मिठाई का भी आनंद लीजिए।  

ध्यान क्या है..और इसे कैसे करें?

ध्यान है केवल स्वयं की उपस्थिति में आनंदित होना; ध्या
न स्वयं में होने का आनंद है। यह बहुत सरल है - चेतना की पूरी तरह से विश्रांत अवस्था जहां आप कुछ भी नहीं कर रहे होते। जिस क्षण आपके भीतर कर्ता भाव प्रवेश करता है आपके अंदर तनाव में आ जाता है; चिंता तुरंत आपके भीतर प्रवेश कर जाती है। कैसे करें? क्या करें? सफल कैसे हों? असफलता से कैसे बचें? तुम पहले ही भविष्य में चले जाते हो।

ध्यान मात्र होना है, बिना कुछ किए - कोई कार्य नहीं, कोई विचार नहीं, कोई भाव नहीं। आप बस हो। और यह एक कोरा आनंद है। जब आप कुछ नहीं करते हो तो यह आनंद कहां से आता है? यह कहीं से नहीं आता या फिर हर जगह से आता है। यह अकारण है, क्योंकि अस्तित्व आनंद नाम की वस्तु से बना है। इसे किसी कारण की आवश्यकता नहीं है। यदि आप  अप्रसन्न हो तो आपके पास अप्रसन्नता का कारण है; अगर आप प्रसन्न हो तो आप बस प्रसन्न हो - इसके पीछे कोई कारण नहीं है। आपक मन कारण खोजने की कोशिश करता है क्योंकि यह अकारण पर विश्वास नहीं कर सकता, क्योंकि यह अकारण को नियंत्रित नहीं कर सकता - जो अकारण है उससे दिमाग बस नपुंसक हो जाता है। तो मन कुछ ना कुछ कारण खोजने में लग जाता है। लेकिन मैं आपको बताना चाहता हूं कि जब भी आप आनंदित होते हो, तो आप किसी भी कारण से आनंदित नहीं होते, जब भी आप अप्रसन्न होते हो, तो आपके पास अप्रसन्नता का कोई कारण होता है - क्योंकि आनंद ही वह चीज है जिससे आप बने हो। यह आपकी ही चेतना है, यह आपका ही अंतरतम है। प्रसन्नता आपका अंतरतम है।

ध्यान की शुरुआत खुद को मन से अलग करने से होती है, एक साक्षी बनने से। खुद को किसी भी चीज से अलग करने का यही एकमात्र तरीका है। यदि आप प्रकाश को देखते हो, स्वाभाविक रूप से एक बात निश्चित है: की आप प्रकाश नहीं हो, आप ही वह हो जो इसे देख रहे हो। यदि आप फूल को देखते हो, तो एक बात निश्चित है: आप फूल नहीं हो, तुम देखने वाले हो। बस आप कुछ नहीं करें यही ध्यान है। सुनने और पढ़ने में बहुत आसान लगता है लेकिन करने में  कठीन है लेकिन असंभव नहीं। धन्यवाद। 

Tuesday, January 12, 2021

श्वास का जीवन से रिश्ता

 ध्यान और स्वास्थ्य के बीच बहुत गहरा संबंध है। क्योंकि बीमारी का बहुत बड़ा हिस्सा मन से मिलता है। गहरे में तो बीमारी का नब्बे प्रतिशत हिस्सा मन से ही आता है। ध्यान मन को स्वस्थ करता है। इसलिए बीमारी की बहुत बुनियादी वजह गिर जाती है। ध्यान की प्रक्रिया से शरीर पर सीधा प्रभाव होता है। क्योंकि दस मिनट की तीव्र श्वास, आपकी जीवन ऊर्जा को, वाइटल एनर्जी को बढ़ाती है। सारा जीवन श्वास का खेल है। जीवन का सारा अस्तित्व श्वास पर निर्भर है। श्वास है तो जीवन है। हम जिस भांति श्वास लेते हैं, वह पर्याप्त नहीं है। हमारे फेफड़े में, समझें, अंदाजन कोई छह हजार छिद्र हैं। हम जो श्वास लेते हैं वह दो हजार छिद्रों से ज्यादा छिद्रों तक नहीं पहुंचती। बाकी चार हजार छिद्र, दो तिहाई फेफड़े सदा ही कार्बन डाइआक्साइड से भरे रह जाते हैं। वह जो चार हजार छिद्रों में भरा हुआ कार्बन डाइआक्साइड है, वह हमारे शरीर की सैकड़ों बीमारियों के लिए कारण बनता है। वह कार्बन डाइआक्साइड समझें कि आपके भीतर जड़ है, जहां से सभी कुछ गलत निकल सकता है। दस मिनट की भस्त्रिका, तीव्र श्वास, धीरे-धीरे आपके छह हजार छिद्रों को छूने लगती है, स्पर्श करने लगती है। आपके पूरे फेफड़े शुद्धतम प्राण से भर जाते हैं। इसका परिणाम होगा, गहरा परिणाम शरीर पर होगा।