Sunday, June 26, 2022

सोमनाथ का दर्शन जरूर करें...सब कष्टों से मिलेगी मुक्ति.






सोमनाथ 
गुजरात राज्य के सौराष्ट्र के सागर कांत में स्थित एक भव्य मंदिर है। भगवान शिव के 12 पवित्र ज्योतिर्लिंगों में से एक ज्योतिर्लिंग यहां सोमनाथ में है।



सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे | How To Reach Somnath Temple 

सोमनाथ मंदिर गुजरात राज्य के गिर सोमनाथ जिले के सोमनाथ शहर में स्थित है, जिसका मुख्यालय वेरावल शहर है। सोमनाथ मंदिर भगवान शिव के 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक है, जहां दर्शन करने के लिए हर साल भारत के हर एक क्षेत्र से लाखों लोग जाते हैं। आइए अब जानते हैं कि सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे?


फ्लाइट से सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Somnath Temple By Flight 

सोमनाथ मंदिर का सबसे करीबी हवाई अड्डा केशोद हवाई अड्डा है, लेकिन एक छोटा हवाई अड्डा होने की वजह से गुजरात के अलावा भारत के अल्प शहरों से ही केशोद हवाई अड्डा के लिए फ्लाइट की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है। दोस्तों अगर आप फ्लाइट के माध्यम से सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने जाने का प्लान बना रहे हैं, तो आप राजकोट हवाई अड्डा या फिर अहमदाबाद (सरदार वल्लभभाई पटेल) अंतर्राष्ट्रीय हवाई अड्डा के लिए फ्लाइट बुक कर सकते हैं, जहां से सोमनाथ मंदिर की दूरी करीब 200 किमी. और 415 किमी. है।राजकोट और अहमदाबाद ये दोनों शहर सोमनाथ मंदिर से रेलवे मार्ग और सड़क मार्ग द्वारा काफी अच्छे से जुड़ा हुआ है, जहां ट्रेन, बस और टैक्सी के माध्यम से पहुंच पाना संभव है।


ट्रेन से सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Somnath Temple By Train 

सोमनाथ शहर में रेलवे स्टेशन की सुविधा उपलब्ध कराई गई है, जहां गुजरात के अधिकांश शहरों के साथ-साथ जबलपुर, इटारसी, भोपाल और उज्जैन से भी पहुंच पाना संभव है। आप देख सकते हैं कि सोमनाथ शहर देश के बहुत ही कम शहरों से रेलवे मार्ग द्वारा जुड़ा हुआ है, इसलिए आप राजकोट या अहमदाबाद के लिए अपने शहर से ट्रेन पकड़ सकते हैं। अहमदाबाद और राजकोट से सोमनाथ मंदिर जाने के लिए ट्रेन, बस और टैक्सी इनमें से किसी भी एक साधन की सुविधा ले सकते हैं।

बस से सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Somnath Temple By Bu

सोमनाथ के लिए गुजरात के अधिकांश शहरों से गुजरात राज्य सरकार के साथ-साथ प्राइवेट बस की सुविधा उपलब्ध कराई जाती है, इसलिए गुजरात राज्य में निवास करने वाले लोगों को बस के माध्यम से सोमनाथ मंदिर जाने में कोई भी परेशानी नहीं होती है। अगर आप गुजरात के अलावा भारत के अन्य राज्यों से संबंध रखते हैं, तो आपको अपने शहर से अहमदाबाद के लिए बस की सुविधा बेहद आसानी से मिल जाएगी, जिससे आप अहमदाबाद पहुंच सकते हैं और अहमदाबाद से दूसरी बस के माध्यम से सोमनाथ मंदिर जा सकते हैं।


बाइक और कार से सोमनाथ मंदिर कैसे पहुंचे – How To Reach Somnath Temple By Bike And car

भले ही सोमनाथ मंदिर अरब सागर के तट पर स्थित है, लेकिन फिर भी आपको सोमनाथ जाने पर सड़कों की स्थिति दयनीय नहीं देखने को मिलेगी, क्योंकि गुजरात सरकार को भी अच्छे से मालूम है कि सोमनाथ मंदिर का नाम भोलेनाथ के 12 ज्योतिर्लिंगों में शामिल है, जिसकी वजह से लाखों श्रद्धालु प्रत्येक वर्ष सोमनाथ मंदिर में भगवान शिव के दर्शन करने के लिए जाते हैं। यह कारण है कि सोमनाथ मंदिर को जोड़ने वाले सड़कों की स्थिति काफी अच्छी है।




सोमनाथ कोई बड़ा शहर नहीं है, इसलिए आपका जो भी जरूरी समान है, आप अहमदाबाद या फिर राजकोट जैसे गुजरात के प्रसिद्ध शहरों में ही खरीद लें, ताकि सोमनाथ मंदिर के दर्शन करने जाने पर आपको कोई तकलीफ ना हो सके।



Sunday, June 19, 2022



रोग को दूर भगाता है योग, जानें किस आसन का क्या है फायदा


योग शरीर के लिए कई तरह से फायदेमंद है. योग करने से ना सिर्फ शरीर फुर्तीला रहता है बल्कि इससे कई तरह की बीमारियां भी दूर होती हैं. कोरोना वायरस जैसी भयकर महामारी के चलते लोग इस समय सेहत को लेकर पहले से ज्यादा जागरूक हो गए हैं. योग कई तरह की बीमारियों को भी ठीक करने में कारगर है. आइए जानते हैं इन योगासन को करने से क्या लाभ होता है...


पद्मासन के फायदे (Benefits of Padmasana)
  • यह रक्त परिसंचरण में वृद्धि, पेट के अंगों, टखनों, पैरों को टोन करता है और कूल्हे को अधिक लचीला बनाता है। ...
  • इसे करने से घुटनों और जांघों को अच्छा खिंचाव मिलता है।
  • एकाग्रता बढ़ाने और ध्यान केंद्रित करने के लिए उत्तम आसन है ।
  • यह जांघों और कूल्हों से वजन कम करने में मदद करता है।



भुजंगासन के फायदे 
(Benefits of Bhujangasana)   

-इससे मांसपेशियां मजबूत होती हैं.

  • -कंधों और बाहों को मजबूती प्रदान होता है.
  • -शरीर में लचीलापन बढ़ता है.
  • -तनाव और थकान को दूर करता है.
  • -भुजंगासन से हृदय स्वस्थ रहता है.
  • -अस्थमा के लक्षणों में आराम मिलता है.
  • -बेडौल कमर को पतली-सुडौल व आकर्षक बनाता है.
  • -इसे रोज़ाना करने से लंबाई बढ़ती है.


पश्चिमोत्तानासन के फायदे (Benefits of Paschimottanasana)
  • तनाव दूर करने में फायदेमंद ...
  • पेट की चर्बी दूर करने में मददगार ...
  • हड्डियों को लचीला बनाने में कारगर ...
  • बेहतर पाचन के लिए फायदेमंद है पश्चिमोत्तानासन ...
  • अनिद्रा की समस्या दूर करता है





धनुरासन के फायदे (Benefits of Dhanurasana)
  • यह आसन डिप्रेशन के लक्षण को कम करने में फायदेमंद रहता है.
  • यह मोटापा को कम करता है और शरीर को संतुलित रखता है.
  • पेट की मांसपेशियो को मजबूत करने में प्रभावी होता है.
  • यह आसन मासपेशियों और हड्डियों को लचीला बनाता है


हलासन के फायदे-(Benefits of Halasana)
  • दिमाग़ को शांत करता है।
  • पेट के अंगों और थायराइड ग्रंथि को उत्तेजित करता है।
  • कंधो और रीढ़ की हड्डी में खिचाव पैदा करता है।
  • तनाव और थकान कम कर देता है। 
  • कमर दर्द, सिर दर्द, बांझपन, अनिद्रा, साइनस के लिए चिकित्सीय। 



सर्वांगासन के फायदे- (Benefits of Sarvangasana)
-दिल की मासपेशियों को सक्रिय करता है और शुद्ध रक्त को दिल तक पहुँचाता है। -बांझपन और गर्भपात जैसी समस्याएं दूर होती हैं। -मासिक धर्म संबंधी परेशानियां दूर करता है। -कब्ज से राहत देता है और पाचन क्रिया को सक्रिय बनाता है।


चक्रासन के फायदे-(Benefits of Chakrasana)
  • इसके नियमित अभ्यास से तनाव और अवसाद दूर होता है ।
  • आंखों की रोशनी तेज होती है ।
  • पाचन और प्रजनन अंगों को स्वस्थ रखता है।
  • पेट के अतिरिक्त मोटापे को कम करता है।
  • अस्थमा के रोगियों को इसका अभ्यास नियमित रूप से करना चाहिए। ...
  • हाथों, पैरों और पीठ की मांसपेशियों को मजबूत बनाता है।


उष्ट्रासन के फायदे (Benefits of Ustrasana)
  • उष्ट्रासन का अभ्यास आपके पूरे शरीर को खोलने में मदद करता है.
  • इससे शरीर के तीन हिस्से यानी कंधे, छाती और कमर बहुत मजबूत बनते हैं.
  • शरीर को लचीला बनाता है.
  • कमर के निचले हिस्से में दर्द की समस्या को कम करता है.
  • उष्ट्रासन थकान, चिंता आदि को दूर करता है.



मयूरासन के फायदे- (Benefits of Mayurasana)
  • आमतौर पर मयूरासन से गुर्दे, अग्नाश्य और आमाशय के साथ ही यकृत इत्यादि को बहुत लाभ होता है।
  • यह आसन फेफड़ों के लिए बहुत उपयोगी है। ...
  • तिल्ली, यकृत, गुर्दे, अग्न्याशय एवं आमाशय सभी लाभान्वित होते है।
  • मधुमेह के रोगियों के लिए भी यह आसन लाभकारी है। ...
  • चेहरे पर चमक लाने के लिए मयूरासन करना चाहिए।


लोलासन के फायदे (Benefits of Lolasana)
  • इस आसन को करने से हाथों और पैरों की कंपन दूर होती है।
  • यह आसन दिल को मजबूत करता है।
  • पेट की मांसपेशियों के विकास के लिए यह आसान एक अच्छा विकल्प है।
  • इस आसन को करने से भुजाओं की मांसपेशियां मजबूत होती है और उन्हें ऊर्जा मिलती है।

कटिचक्रासन के फायदे-(Benefits of Kati Chakrasana)
– इस आसन को अगर रोज किया जाए तो पेट की कई समस्याओं से छुटकारा पाया जा सकता है। इससे कब्ज और गैस की समस्या से भी छुटकारा मिलता है। – सांस संबंधी रोग के लिए भी कटिचक्रासन फायदेमंद होता है।


Monday, June 13, 2022

रक्तदान दूसरे के लिए जीवनदान तो वही आपके लिए लाभकारी भी


हर साल 14 जून को विश्व रक्तदाता दिवस मनाया जा सकता है ताकि ट्रांसफ्यूज़न के लिए सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता फैलाई जा सके। यह दिन उन लोगों के योगदान का भी सम्मान करता है, जो राष्ट्रीय स्वास्थ्य प्रणालियों में खुद से और बिना पैसे लिए ब्लड डोनेट करते हैं।

रक्त और रक्त से जुड़े प्रोडक्ट्स कई लोगों की जान बचाने का काम करते हैं, जैसे- गर्भावस्था और प्रसव से संबंधित रक्तस्राव से पीड़ित महिलाएं, मलेरिया और कुपोषण के कारण एनीमिया से पीड़ित बच्चे, ट्रॉमा, आपात स्थिति, आपदाओं और दुर्घटनाओं के शिकार, और रक्त और बोन मैरो विकार से पीड़ित लोग, हीमोग्लोबिन के वंशानुगत विकार और प्रतिरक्षा-कमी की स्थिति।


*ब्लड डोनेशन के फायदे*

कैंसर का खतरा कम- 

अगर आप समय-समय पर रक्तदान करते रहते हैं तो इससे आपके शरीर में आयरन की अधिकता नहीं होती है. जिससे आपका शरीर कुछ खास तरह के कैंसर के खतरे से बच सकता है. 


हार्ट को हेल्दी रखता है- 

ब्लड डोनेशन से आपका दिल हेल्दी रहता है. आपको दिल की बीमारियां और स्ट्रोक का खतरा कम रहता है. खून में ज्यादा आयरन होने से दिल के स्वास्थ्य पर असर पड़ता है, लेकिन रक्त दान करने से शरीर में आयरन की मात्रा संतुलित रहती है. 


वजन कंट्रोल- 

रक्तदान से वजन कम होता है और कैलोरी बर्न होती हैं. लाल रक्त कोशिकाओं का लेवल कुछ महीने में बराबर हो जाता है. ऐसे में अगर आप हेल्दी डाइट और एक्सरसाइज करते हैं तो इससे वजन कंट्रोल करने में मदद मिलती है. 


रेड सेल्स प्रोडक्शन- 

ब्लड डोनेशन के बाद शरीर खून की कमी को पूरा करने के लिए काम करता है. ऐसे में शरीर में लाल रक्त कोशिकाएं ज्यादा बनती हैं, जिससे आपकी सेहत को सुधार आता है. 


सेहत अच्छी रहती है- 

अगर आप नियमित रूप से रक्तदान करते हैं तो इससे शरीर की कोशिकाएं प्रोत्साहित होती हैं. इसके असर से आपकी फिटनेस अच्छी रहती है और ब्लड प्रेशर भी कंट्रोल रहता है. रक्तदान करने से आप किसी की जान बचा सकते हैं किसी के काम आ सकते हैं जो आपको संतुष्टि वाली फीलिंग भी देता है.


*रक्तदान का महत्व*

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, सेफ ब्लड और ब्लड प्रोडक्ट और उनका देखभाल और सार्वजनिक स्वास्थ्य के महत्वपूर्ण पहलू हैं। वे लाखों लोगों की जान बचाते हैं और हर दिन कई रोगियों के स्वास्थ्य और जीवन की गुणवत्ता में सुधार करते हैं। रक्त की आवश्यकता सार्वभौमिक है, लेकिन रक्त उन सभी के लिए उपलब्ध नहीं है जिन्हें इसकी आवश्यकता है।


*विश्व रक्तदाता दिवस का इतिहास*

पहला विश्व रक्त दाता दिवस 2004 में डब्ल्यूएचओ द्वारा मनाया गया था और 2005 में 58वीं विश्व स्वास्थ्य सभा में इसे वार्षिक वैश्विक कार्यक्रम के रूप में घोषित किया गया था। यह दिन ऑस्ट्रियाई जीवविज्ञानी और चिकित्सक, कार्ल लैंडस्टीनर की जयंती पर मनाया जाता है। उन्हें आधुनिक रक्त आधान का संस्थापक माना जाता है। साल 2004 में स्थापित इस कार्यक्रम का मुख्य उद्देश्य सुरक्षित रक्त और रक्त उत्पादों की आवश्यकता के बारे में जागरूकता बढ़ाना है।


Sunday, June 5, 2022





 गेहूं की तोंद .....


गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है

अमेरिका के एक हृदय रोग विशेषज्ञ हैं डॉ विलियम डेविस...उन्होंने एक पुस्तक लिखी थी 2011 में जिसका नाम था "Wheat belly गेंहू की तोंद"...यह पुस्तक अब फूड हेबिट पर लिखी सर्वाधिक चर्चित पुस्तक बन गई है...पूरे अमेरिका में इन दिनों गेंहू को त्यागने का अभियान चल रहा है...कल यह अभियान यूरोप होते हुये भारत भी आएगा...यह पुस्तक ऑनलाइन भी उपलब्ध हैं और कोई फ़्री में पढ़ना चाहे तो भी मिल सकती है....


मोटापे का कारण गेंहूं

चौंकाने वाली बात यह है कि डॉ डेविस का कहना है कि अमेरिका सहित पूरी दुनिया को अगर मोटापे, डायबिटिज और हृदय रोगों से स्थाई मुक्ति चाहिए तो उन्हें पुराने भारतीयों की तरह ज्वार ,बाजरा, रागी, चना, मटर, कोदरा, जो, सावां, कांगनी ही खाना चाहिये गेंहू नहीं*......जबकि यहां भारत का हाल यह है कि 1980 के बाद से लगातार सुबह शाम गेंहू खा खाकर हम महज 40 वर्षों में मोटापे और डायबिटिज के मामले में दुनिया की राजधानी बन चुके हैं...


भारत में जौ की रोटी बहुत लोकप्रिय थी

गेंहू मूलतः भारत की फसल नहीं है. यह मध्य एशिया और अमेरिका की फसल मानी जाती है और आक्रांताओ के भारत आने के साथ यह अनाज भारत आया था...उससे पहले भारत में जौ की रोटी बहुत लोकप्रिय थी और मौसम अनुसार मक्का, बाजरा, ज्वार आदि...भारतीयों के मांगलिक कार्यों में भी  जौ अथवा चावल (अक्षत) ही चढाए जाते रहे हैं। प्राचीन ग्रंथों में भी इन्हीं दोनों अनाजों का अधिकतम जगहों पर उल्लेख है...

मिक्स अनाज की रोटी का प्रचलन अधिक था

जयपुर  निवासी प्रशासनिक अधिकारी नृसिंह जी की बहन विजयकांता भट्ट (81 वर्षीय) अम्मा जी कहती हैं कि 1975-80 तक भी आम भारतीय घरों में बेजड़ (मिक्स अनाज,Multigrain) की रोटी का प्रचलन था जो धीरे धीरे खतम हो गया। 1980 के पहले आम तौर पर घरों में मेहमान आने या दामाद के आने पर ही गेंहू की रोटी बनती थी और उस पर घी लगाया जाता था, अन्यथा बेजड़ की ही रोटी बनती थी ......आज घरवाले उसी बेजड़ की रोटी को चोखी ढाणी में खाकर हजारों रुपए खर्च कर देते हैं....

आज 77 प्रतिशत भारतीय ओवरवेट 

हम अक्सर अपने ही परिवारों में बुजुर्गों के लम्बी दूरी पैदल चल सकने, तैरने, दौड़ने, सुदीर्घ जीने, स्वस्थ रहने के किस्से सुनते हैं। वे सब मोटा अनाज ही खाते थे गेंहू नहीं। एक पीढ़ी पहले किसी का मोटा होना आश्चर्य की बात होती थी, आज 77 प्रतिशत भारतीय ओवरवेट हैं और यह तब है जब इतने ही प्रतिशत भारतीय कुपोषित भी हैं...फ़िर भी 30 पार का हर दूसरा भारतीय अपनी तौंद घटाना चाहता है....

गेहूं त्यागना ही पड़ेगा

गेंहू की लोच ही उसे आधुनिक भारत में लोकप्रिय बनाये हुये है क्योंकि इसकी रोटी कम समय और कम आग में आसानी से बन जाती है...पर यह अनाज उतनी आसानी से पचता नहीं है...समय आ गया है कि भारतीयों को अपनी रसोई में 80-90 प्रतिशत अनाज जौ, ज्वार, बाजरे, रागी ,मटर, चना, रामदाना आदि को रखना चाहिये और 10-20 प्रतिशत गेंहू को... हाल ही कोरोना ने जिन एक लाख लोगों को भारत में लीला है उनमें से डायबिटिज वाले लोगों का प्रतिशत 70 के करीब है...वाकई गेहूं त्यागना ही पड़ेगा.... अन्त में एक बात और भारत के फिटनेस आइकन 54 वर्षीय टॉल डार्क हेंडसम (TDH) मिलिंद सोमन गेंहू नहीं खाते हैं....


अगली पीढ़ी के बच्चे डायबिटिज लेकर ही पैदा होंगे...।

'न्यू यॉर्क टाइम्स' के सबसे अधिक बिकने वाली किताब "Wheat Belly" (गेहूं की तोंद) में से लिया गया अंश। 

लेखक: डॉ. विलियम डेविस, M.D.प्रसिद्ध हृदय रोग चिकित्सक......

संकलन - एम के जैन

    


विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम ''Only One Earth'' यानी केवल एक पृथ्वी 

हमारी धरती, जनजीवन को सुरक्षित रखने के लिए पर्यावरण का सुरक्षित रहना बहुत जरूरी है। विश्व के देश आधुनिकता की ओर बढ़ रहे हैं लेकिन इस राह में दिनों दिन दुनियाभर में ऐसी चीजों का इस्तेमाल बढ़ गया है और इस तरह से लोग जीवन जी रहे हैं, जिससे पर्यावरण खतरे में हैं। इंसान और पर्यावरण के बीच गहरा संबंध है। प्रकृति के बिना जीवन संभव नहीं। ऐसे में प्रकृति के साथ इंसानों को तालमेल बिठाना होता है। लेकिन लगातार वातावरण दूषित हो रहा है, जिससे कई तरह की समस्याएं बढ़ रही हैं, जो हमारे जनजीवन को तो प्रभावित कर ही रही हैं, साथ ही कई तरह की प्राकृतिक आपदाओं की भी वजह बन रही हैं। सुखी स्वस्थ जीवन के लिए पर्यावरण का संरक्षण जरूरी है। इसी उद्देश्य से हर साल विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाता है। इस दिन लोगों को पर्यावरण के प्रति सचेत किया जाता है और पर्यावरण को संरक्षित करने के लिए प्रोत्साहित किया जाता है। विश्व पर्यावरण दिवस कब और क्यों मनाया जाता है, इस दिन का क्या महत्व और आवश्यकता है और पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत कब से हुई, ये बातें जान पर्यावरण के प्रति आप भी होंगे जागरुक।



World Environment Day 2022 

हर साल दुनियाभर में आज यानी 5 जून को पर्यावरण दिवस मनाया जाता है. पर्यावरण दिवस के जरिए लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक कराने की कोशिश की जाती है  इंसान के जीने के लिए सभी जरूरी चीजें हमें पर्यावरण से ही मिलती हैं. इसलिए जरूरी होता है कि हम पर्यावरण की रक्षा करें और धरती पर संतुलन बनाए रखें. आज के इस औद्योगिक सभ्यता वाले युग में पर्यावरण बुरी तरह से दूषित हो रहा है. पर्यावरण में प्रदूषण के बढ़ते लेवल की वजह से कभी बारिश तो कभी सूखे की...स्थिति रहती है. ऐसे में जरूरी है कि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरुक कराया जाए



पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत कब हुई

पहली बार पर्यावरण दिवस की शुरुआत 1972 में हुई थी। इस दिन की नींव संयुक्त राष्ट्र संघ ने 5 जून 1972 को रखी थी। इसी के बाद से हर साल लगातार 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस मनाया जाने लगा।




किस देश ने मनाया था सबसे पहले पर्यावरण दिवस

भले ही संयुक्त राष्ट्र संघ ने विश्व पर्यावरण दिवस मनाने का फैसला किया हो लेकिन पर्यावरण दिवस को सबसे पहले स्वीडन की राजधानी स्टॉकहोम में मनाया गया। 1972 में स्टॉकहोम में पहली बार पर्यावरण सम्मेलन आयोजित किया गया था, जिसमें 119 देशों में हिस्सा लिया था




पर्यावरण दिवस मनाने का उद्देश्य

दुनिया में लगातार प्रदूषण बढ़ रहा है। इसी बढ़ते प्रदूषण के कारण प्रकृति पर खतरा बढ़ रहा है। जिसे रोकने के उद्देश्य से पर्यावरण दिवस मनाने की शुरुआत हुई, ताकि लोगों को पर्यावरण के प्रति जागरूक किया जाए और प्रकृति को प्रदूषित होने से बचाने के लिए प्रेरित किया जा सके।



पर्यावरण दिवस की थीम

विश्व पर्यावरण दिवस 2022 की थीम ''Only One Earth'' यानी केवल एक पृथ्वी है। इस थीम के आधार पर 'प्रकृति के साथ सद्भाव में रहना' पर ध्यान केंद्रित किया जा रहा है










Thursday, June 2, 2022



‘विश्‍व साइकिल दिवस’

साइकिल चलाना सीखना शायद हम सभी की बचपन की याद का पसंदीदा लम्हा है। साइकिल को बैलेंस करते हुए पैडल चलाना और कई बार गिर जाना, साइकिल ने शायद हमें ज़िदगी में काफी कुछ सिखाया है। अपना बैलेंस बनाए रखने के लिए आगे बढ़ते रहना ज़रूरी है। दुनिया के कई ऐसे हिस्से हैं, ,जहां आज भी साइकिल के ज़रिए ही एक जगह से दूसरी जगह जाया जाता है। इनमें यूरोप, डेनमार्क और नीदरलैंड्स जैसी जगहें शामिल हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि भारत का साइकिल उद्योग दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा बाज़ार है? साथ ही हमारा देश साइकिल का तीसरा सबसे बड़ा उपभोक्ता है।

साइकिल चलाने के फायदे कई हैं। इसे न सिर्फ खरीदना आसान है, यह आपको फिट रखती है और वातावरण को भी नुकसान नहीं पहुंचाती। यही वजह है कि अप्रैल 2018 में संयुक्त राष्ट्र महासभा ने 3 जून को विश्व साइकिल दिवस के रूप में मनाने की घोषणा की थी। विश्व साइकिल दिवस साइकिल को मानव प्रगति, उन्नति, स्थिरता, सामाजिक समावेश और शांति की संस्कृति के प्रतीक के रूप में मनाता है।

साइकिल और इंसान के बीच अटूट बंधन

साइकिल लंबे समय से मनुष्य के जीवन का हिस्सा रही है। हालांकि, इस रिश्ते में साल दर साल बदलाव देखा गया है। आपने अपने मां-बाप या दादा-नाना से साइकिल से जुड़ी

कई कहानियां सुनी होंगी कि वे किस तरह स्कूल तक पहुंचने के लिए साइकिल से मीलों दूर का सफर तय करते थे। साइकिल ने उनके लिए दूर का सफर आसान बना दिया था। हालांकि, आज के ज़माने में लोग घंटों साइकिल चालकर इससे सेहत और वातावरण को पहुंचने वाले फायदों के बारे में जागरुकता फैलाते हैं।


इसलिए चलाएं साइकिल

-साइकिलिंग से पर्यावरण में प्रदूषण नहीं होता.

-आधा घंटा साइकिलिंग से बॉडी फिट रहती है और शरीर पर चर्बी नहीं आती.

-साइकिल चलाने से इम्यून सिस्टम अच्छा रहता है और पाचन क्रिया ठीक रहती है.

-रोजाना साइकिलिंग से दिमाग 15 से 20 फीसदी एक्टिव रहता है.

-साइकिलिंग सबसे सस्‍ता परिवहन साधन है.

-हार्ट और लंग्स स्‍ट्रॉन्‍ग रहते हैं और कई जानलेवा बीमारियां दूर रहती हैं.


Monday, May 23, 2022

महाप्रभु जगन्नाथ का रहस्य





भगवान् कृष्ण ने जब देह छोड़ी तो उनका अंतिम संस्कार किया गया , उनका सारा शरीर तो पांच तत्त्व में मिल गया,लेकिन उनका हृदय बिलकुल सामान्य एक जिन्दा आदमी की तरह धड़क रहा था और वो बिलकुल सुरक्षित था , उनका हृदय आज तक सुरक्षित है, जो भगवान् जगन्नाथ की काठ की मूर्ति के अंदर रहता है और उसी तरह धड़कता है , ये बात बहुत कम लोगो को पता है,

महाप्रभु का महा रहस्य
सोने की झाड़ू से होती है सफाई......
महाप्रभु जगन्नाथ(श्री कृष्ण) को कलियुग का भगवान भी कहते है.... पुरी(उड़ीसा) में जग्गनाथ स्वामी अपनी बहन सुभद्रा और भाई बलराम के साथ निवास करते है, मगर रहस्य ऐसे है कि आजतक कोई न जान पाया,

पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता
हर 12 साल में महाप्रभु की मूर्ती को बदला जाता है,उस समय पूरे पुरी शहर में ब्लैकआउट किया जाता है, यानी पूरे शहर की लाइट बंद की जाती है,लाइट बंद होने के बाद मंदिर परिसर को crpf की सेना चारो तरफ से घेर लेती है,उस समय कोई भी मंदिर में नही जा सकता,

एक मूर्ति से दूसरे में होती है प्राण प्रतिष्ठा
मंदिर के अंदर घना अंधेरा रहता है...पुजारी की आँखों मे पट्टी बंधी होती है...पुजारी के हाथ मे दस्ताने होते है..वो पुरानी मूर्ती से "ब्रह्म पदार्थ" निकालता है और नई मूर्ती में डाल देता है...ये ब्रह्म पदार्थ क्या है आजतक किसी को नही पता...इसे आजतक किसी ने नही देखा. ..हज़ारो सालो से ये एक मूर्ती से दूसरी मूर्ती में ट्रांसफर किया जा रहा है,
ये एक अलौकिक पदार्थ है जिसको छूने मात्र से किसी इंसान के जिस्म के चिथड़े उड़ जाए... इस ब्रह्म पदार्थ का संबंध भगवान श्री कृष्ण से है...मगर ये क्या है ,कोई नही जानता,भगवान जगन्नाथ और अन्य प्रतिमाएं उसी साल बदली जाती हैं, जब साल में आसाढ़ के दो महीने आते हैं। 19 साल बाद यह अवसर आया है,वैसे कभी-कभी 14 साल में भी ऐसा होता है, इस मौके को नव-कलेवर कहते हैं,

महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है ???
मगर आजतक कोई भी पुजारी ये नही बता पाया की महाप्रभु जगन्नाथ की मूर्ती में आखिर ऐसा क्या है ???
कुछ पुजारियों का कहना है कि जब हमने उसे हाथ में लिया तो खरगोश जैसा उछल रहा था...आंखों में पट्टी थी...हाथ मे दस्ताने थे तो हम सिर्फ महसूस कर पाए,
आज भी हर साल जगन्नाथ यात्रा के उपलक्ष्य में सोने की झाड़ू से पुरी के राजा खुद झाड़ू लगाने आते है,

मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर पर समुद्र की लहरों की आवाज
भगवान जगन्नाथ मंदिर के सिंहद्वार से पहला कदम अंदर रखते ही समुद्र की लहरों की आवाज अंदर सुनाई नहीं देती, जबकि आश्चर्य में डाल देने वाली बात यह है कि जैसे ही आप मंदिर से एक कदम बाहर रखेंगे, वैसे ही समुद्र की आवाज सुनाई देंगी,
आपने ज्यादातर मंदिरों के शिखर पर पक्षी बैठे-उड़ते देखे होंगे, लेकिन जगन्नाथ मंदिर के ऊपर से कोई पक्षी नहीं गुजरता,झंडा हमेशा हवा की उल्टी दिशामे लहराता है,
दिन में किसी भी समय भगवान जगन्नाथ मंदिर के मुख्य शिखर की परछाई नहीं बनती,

शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता
भगवान जगन्नाथ मंदिर के 45 मंजिला शिखर पर स्थित झंडे को रोज बदला जाता है, ऐसी मान्यता है कि अगर एक दिन भी झंडा नहीं बदला गया तो मंदिर 18 सालों के लिए बंद हो जाएगा,
इसी तरह भगवान जगन्नाथ मंदिर के शिखर पर एक सुदर्शन चक्र भी है, जो हर दिशा से देखने पर आपके मुंह आपकी तरफ दीखता है,

रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन
भगवान जगन्नाथ मंदिर की रसोई में प्रसाद पकाने के लिए मिट्टी के 7 बर्तन एक-दूसरे के ऊपर रखे जाते हैं, जिसे लकड़ी की आग से ही पकाया जाता है, इस दौरान सबसे ऊपर रखे बर्तन का पकवान पहले पकता है।
भगवान जगन्नाथ मंदिर में हर दिन बनने वाला प्रसाद भक्तों के लिए कभी कम नहीं पड़ता, लेकिन हैरान करने वाली बात ये है कि जैसे ही मंदिर के पट बंद होते हैं वैसे ही प्रसाद भी खत्म हो जाता है और भी कितनी ही आश्चर्यजनक चीजें हैं

Friday, May 20, 2022


 


अंतर्राष्ट्रीय चाय दिवस


अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस की शुरुआत साल 2020 से हुई है। लेकिन भारतीयों के किसी भी चीज की शुरुआत चाय के साथ होती है। जी हां, फिर सुबह हो, दोस्ती हो, किसी चीज का सुलह करना हो या किसी के साथ समय बिताना हो। भारत में यह कहा जा सकता है कि जिसके साथ भी हर दिन एक चाय पीते हैं उनके रिश्ते अधिक प्रगाढ़ होते हैं। अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस 21 मई 2022 को तीसरी बार मनाया जा रहा है। हालांकि हर साल 15 दिसंबर को अन्य देशों में चाय दिवस मनाया जाता है।


इस दिन को मनाने का उद्देश्य

 

पानी के बाद सबसे अधिक पीने वाला पेय चाय ही है। चाय दिवस को मनाने का उद्देश्य है गरीब लोगों को इसके आर्थिक लाभ मिलने के बारे में जागरूक करना। खासकर उन क्षेत्रों में जहां  इसकी पैदावार अधिक होती है। समूचे विश्व में चाय की डिमांड बहुत अधिक है लेकिन इसका व्यापार इतने बड़े स्तर पर नहीं है।


अंतरराष्ट्रीय चाय दिवस 2022 की थीम “दुनिया भर में चाय का जश्न मनाना” (Celebrating Tea Around The World) है। इसके साथ ही Tea Day एक आदर्श वाक्य के साथ मनाया जाता है जो ‘फील्ड से लेकर कप तक (From Field to Cup)‘ है।

Monday, September 20, 2021

PUNJAB : "KEEP IT STRONG AND SECURE"

 


"The Captain era has come to an end in Punjab and today the new CM Charanjit Singh Channi has taken oath as the Chief Minister. Explaining why Punjab is important for this country, retired Major General Manoj Oak, who is a defense expert, is currently the Chair Professor of Savitri Bai Phule University, Pune

                                The geographic  location of Punjab  is what gives it added importance. Lying just below the Jammu region, it guards the 600 km plains sector of our International Border with Pakistan. Amritsar is the heart and soul of this state of the brave, good hearted and rustic Punjabis  who are ever ready for a bit of adventure and enterprise. But alarmingly, of late, Punjab is hurtling down the dark abyss of drugs and substance abuse.  Being located on the Pakistan Border, the drug smuggling rackets thrive here and the young valarous Punjabi known for his love for farming and soldiering is battling the demons of drug addiction.

            The country and the state of Punjab are presently engaged in fighting a war on drugs in Punjab.  Drugs' and ' drones' are one of the many nefarious means being aggressively used by our inimical western adversary to destabilise this golden land. India draws tremendous strength from the state of Punjab. Major rivers like Ravi, Satluj and Beas, their tributaries and effective canal network give Punjab an inherent strength to tide over any agrarian and weather related crisis. This bounty of nature and irrigation planning is complemented by the enterprising nature of the Punjabis which has brought prosperity and glory to this land.

            A strong Punjab is the western anvil of our nation and this is precisely what our western neighbour is trying to break by proxy. The earlier efforts by foreign based fundamedametalist outfits to destabilise Punjab was by exploiting the religious sentiments and fuelling a mistaken belief that a separate state of Khalistan could be carved out.

            It needed an excruciating  decade from 1980 to 1990 to wean the youth away from such a radical  misadventure. Although the State is still nursing the psychological wounds caused to remove the cancerous growth of religious fundamentalism, Pakistan is trying hard to prop up misguided elements and reignite the dying embers of separatist thoughts.

            Pakistan gives  a very high priority to destabilise Indian Punjab. This is because Punjab provides inherent strength to India as a strong border state that boasts of loyal populace, strong economy and abundant water. It is therefore a leadership challenge at national level  to keep Punjab away from drugs and terrorism.

            The heroism of the  Sikhs is folklore. The leadership qualities of Guru Govind Singh, Maharana Ranjit Singh, Guru Teg Bahadur and scores of such great Sikh warriors are legendary , emulatory and rare. Punjab ranks amongst the highest in the gallantry awards won by military personnel hailing from this state..It has an Army Regiment named after it i.e. the Punjab Regiment along with the Sikh Regiment and the Sikh Light Infantry Regiment. This, along with its all-round track record makes Punjab a frontline state of India.

 So why is Punjab a leadership challenge at the national level ?  Well, it is so because it has a 600 km border with Pakistan, the proxy war launched by Pakistan and the widespread drug menace.. This juxtaposed with the gullible Punjabi youth with high adrenaline , more propensity to take risk and the human lure for easy money has been assiduously cultivated  by Pakistan resulting in a huge security challenge for Punjab and India. This challenge, unless combated by positive cultural and disciplinarian forces, is sure to have catastrophic results for the stability of Punjab.

            It therefore becomes mandatory for our central and state leadership to lead the way by persuasive, educational and reformative measures to keep the  youth in good spiritual, mental and emotional health.  Petty politics has to make way for unselfish measures  to strengthen the state's fabric and the nation’s security.                         

Tuesday, July 13, 2021

They saved countless American lives but now same Americans have left them to their own fate

 

A emotional story on Afghani Translator By- Shlok Thakur, HYD



Afghan translators no doubt were most crucial things for American soldiers from starting of 2001 US invasion of Afghanistan to this day.  They helped American soldiers talk with locals and their allies to know exact location of Taliban soldiers and terrorists. In Afghanistan accurate translations can be difference between life and death. There was incident in which an Afghani local warned the American soldiers that beyond village there is minefield. This was correctly translated by translator present over there. This is just one example. If you ask any American veterans who has fought in Afghanistan they will tell you that translators risked their own lives to help them. This help automatically makes them the target for insurgents. But now since American soldiers are leaving Afghanistan Taliban will probably kill the translators who have helped Americans. Since they helped Americans, they should be brought to America. But many translators who applied visa are still stuck in bureaucratic limbo. Though the American congress has passed bills in 2008 and 2009 providing visas to afghan nationals who have worked with American soldiers and despite huge demand very few visas have been issued. Americans have the capacity to issue 1500 visas per year but till now they have only issued an average of 3 visas per year. It is like next to impossible for afghan nationals to get US visas. Problem is that applying for special immigrant visa is a 14 step process. Process for special immigrant visa is that first you need to fill a d157 form which contains basic information. Also you need to get a letter from you former military supervisor and your former and current military contractor which can take lot of time. You also need to submit a proof of nationality and a copy of you employee badge. Then you must wait for few months or few years and if you are approved then you go to the stage. For this you need to fill i364 form which is repeat of d157. Next you need to fill ds264 form which contains some very baseless or just ridiculous questions. After this you need a security clearance which can again take several months or years, medical examination and paying for passport and plane seat form your own money then you can finally come to United States. This whole process makes no sense. Though security clearances are necessary America has done it quicker before in the history. At the end of Vietnam War they issued one lakh forty thousand Vietnamese visa to America. They first took them to Guam and then issued visas there. Even when Afghani translators get their visas in most of the cases it’s too late. Let’s look at an example of this. Ali was an afghan translator who filed his application in September 2010 and came America in 2013. But during that time Taliban fighters killed his dad and his brothers. The fighters took his three year old brother and asked for money. He have to spend his life savings to get his brother. 

American president Joe Biden must bring those translators to America because they have no doubt saved countless American lives. Process of bringing them must be done fastly.

Friday, July 2, 2021

हाई ब्लड प्रेशर के मरीज करे ये काम मिलेगा तुरंत लाभ..

 



फल और साग-सब्जियों के मामले में हमारा देश काफी धनी है। यहां मांसाहार की तुलना में शाकाहारी भोजन को काफी पसंद किया जाता है..लेकिन जानकारी के अभाव में लोग हमसब गुणकारी सब्जियों का लाभ नहीं उठा पाते। अगर आप भी खाने-पीने के शौकीन हैं और अपने आहार में गुणकारी सब्जियों को शामिल कीजिए. 


सहजन क्या है?

हमसब सहजन से परिचित है. अंग्रेजी में ड्रमस्टिक (Drumstick)  या मोरिंगा(Moringa) कहा जाता है। सहजन की सब्जी आजकल हर घर में बनाया जाता है। आप जानकर हैरान होंगे की हमारा देश मोरिंगा का सबसे बड़ा उत्पादक है। सहजन का पेड़ बहुत ही तेजी से बढ़ता है और इसकी फलियों के साथ इसके पत्ते और फूल का भी इस्तेमाल हमारे देश में खाने के लिए किया जाता है। सहजन के ये तीनों हिस्सा बहुत गुणकारी हैं। खाने में तो इसका स्वाद सभी को अच्छा लगता है. सहजन में प्रोटीन, अमीनो एसिड, बीटा कैरटीन और विभिन्न फीनॉलिक होते हैं.

  

हाई ब्लड प्रेशर के लक्षण-

हाई ब्लड प्रेशर(blood pressure) रोगी को सिर में दर्द, सिर में भारीपन, चक्कर आना, थकावट महसूस करना, मानसिक और शारीरिक श्रम से अनिच्छा. नींद न आना, सिर की नसों का फड़कना, घबराहट, जी मिचलाना, गैस की तकलीफ, मानसिक तनाव से एकाग्रता का अभाव, सीने में दर्द, आदि की शिकायत रहती है। लेकिन आप इससे आप घबराए नहीं. यदि आपको हाई ब्ल्ड प्रेशर के मरीज है तो आप तुरंत ये काम करें--

 

सहजन की पत्ती को कैसे उपयोग करे-

सहजन की पत्ती में हाई ब्लड प्रेशर कंट्रोल करने के गुण हैं...हाई ब्लड प्रेशर के मरीजों को सहजन की पत्तियों को एक ग्लास पानी में उबाल ले...जब पानी उबल कर आधा हो जाए तो इसे ठंडा कर लें और छानकर पी लें.. लेकिन ये पानी रोज नहीं पीना है..दो दिन तक लगातार पीकर फिर इसे छोड़ दिए..जब अपना ब्लड प्रेशर सामान्य या कम हो जाए तो इसे  सप्ताह में एक दिन लेना है. प्रेशर कम हो जाए तो आप दो-दो दिन को अंतराल पर पी सकते है। लेकिन ध्यान रहे आपको अपना प्रेशर रोज मापना है..ताकि आपको पता चल सके कि कितना कम हुआ है? यदि कम हो जाए तो इसे स्प्ताह में एक दिन ही लेना है।    


सहजन फली के कई लाभ--

 

-सहजन की फली में प्रचुर मात्रा में कैल्शियम होता है 

-बच्चों के लिए बहुत फायदेमंद है इससे हड्डियां और दांत मजबूत होते हैं

-गर्भवती महिलाओं को फली खाने से बच्चों में कैल्शियम की मात्रा भरपूर मिलती है

-यह मोटापा कम करने और शरीर की बढ़ी चर्बी को दूर करता है

-फॉस्फोरस की मात्रा अधिक होने से यह शरीर की अतिरिक्त कैलोरी को कम करता है  

-सहजन के सेवन से खून साफ होता है

-सहजन की फली का सेवन करने से गर्भवतियों को डिलिवरी के समय अधिक दर्द नहीं होता 

-कैंसर के लिए सहजन काफी लाभदायक है

-मधुमेह के विमारी में भी सहजन लाभदायक है

-हृदय को स्वस्थ रखने में सहजना लाभकारी है

-सहजन लिवर के लिए काफी फायदेमंद है 

 -इम्युनिटी बढ़ाने के लिए भी सहजन का उपयोग किया जाता है

 -त्वचा के लिए भी सहजन काफी गुणकारी है

Monday, June 21, 2021

योग दिवस के मौके पर शुरू करे सूर्य नमस्कार--मिलेंगे कई फायदे

 


आज जब पूरी दूनिया में कोरोना से लोग परेशान है और इस बिमारी ने लाखों लोगों को जान ली है..दूनियाभर के वैज्ञानिक इस बीमारी पर काबू करने के लिए लगातार प्रयोग कर रहें हैं...वैसे वैक्सिन लगाकर आपर कोरोना पर नियंत्रित कर सकते है.. लेकिन लंबे समय से इस बिमारी से बचने के लिए आपको योग का सहारा चाहिए...योग सभी के जीवन के लिए बहुत जरूरी है। 

योग में सूर्य नमस्कार का अलग ही महत्व है. सूर्यनमस्कार का मतलब “सूर्य को नमस्कार करना” । यह योगासनों में सर्वश्रेष्ठ माना गया है। इसे करने से शरीर रोग मुक्त होता है तो मानसिक तौर पर व्यक्ति सबल होता है... इसे आप योग के तौर पर या एक्सरसाइज के तौर पर भी कर सकते हैं..योग के तौर पर कहने का मतलब धीरे-धीरे अभ्यास करना और गति के साथ करते हैं तो ये एक्सरसाइज हो जाता है..ये  घर में भी हो सकती है, जब आपके पास बाहर पार्क में जाने का ऑप्शन ना हो इसमें आपको सिर्फ एक योगा मैट या कंबल बिछाकर आप सूर्य नमस्कार कर सकते हैं। 

कितने समय तक करें

हर रोज इसे 5-10 मिनट तक किया जा सकता है इसे करने के बाद आपको और कुछ करने की आवश्यकता रह जाती है.. सूर्यनमस्कार में कुल 12 आसन के पोज़ होते हैं । इसे 5 राउंड से लेकर 10 राउंड तक किया जा सकता है..लेकिन थकावट नहीं हो तो इसे बढ़या भी जा सकता है..

कैसे और कौन करें-

यदि युवा वर्ग है तो इसे गति के साथ के कीजिए ताकि आपके काफी अच्छा लगे..लेकिन जो लोग कमजोर या अधिक उम्र के  है वो धीरे-धीरे करें ताकि आपके शरीर में दर्द नहीं हो..बच्चे लोग भी इसे गति के साथ करें तो काफी लाभ मिलता है.

शरीर के किस चक्र को प्रभावित करता है?

हमारे देश में इतिहास और विज्ञान को जोड़कर देखते है तो पता चलता है कि सूर्य नमस्कार करने के कई फायदे है. प्राचीन समय में हमारे त्रृषि-मुनि द्वारा कहा जाता था कि शरीर को चलाने वाले विभिन्न अंग, अलग अलग देवताओं के द्वारा संचालित होते हैं। जबकि विज्ञान के नज़रिए से पता चला है कि शरीर के हर अंग को चलाने के लिए एक दिव्य ऊर्ज की जरूरत होती है। इसी तरह हमारी नाभि के पीछे ही होता है मणिपुर चक्र। यह चक्र सूर्य से संबंधित और इसे मानव शरीर का केंद्र भी कहा जाता है। 

इसके करने  के क्या फायदे है-

-सूर्य नमस्कार रोज करने से उसकी रचनात्मकता और अंतर्ज्ञान बढ़ता है

-तनाव दूर करने में सूर्य नमस्कार काफी लाभदायक है

-नींद ना आने की समस्या में भी ये फ़ायदेमंद है

-रीढ़ की हड्डी को मजबूत करने में भी काफी मददगार है

-यह पाचन क्रिया को बेहतर करता है 

-वजन कम करने में ये लाभकारी है

-सूर्यनमस्कार शरीर को काफी लचीला बनाता है

-एकाग्रता बढ़ाने में भी मददगार है

-पीरियड्स को रेग्युलर करने, हैवी ब्लीडिंग या कम ब्लीडिंग को सही करने में भी मददगार है

-गुड हार्मोन्स का स्त्राव बढ़ता है

-डिटॉक्स करने में मिलती है मदद

 -रोज़ करने से, आप 1 दिन में 400 से भी अधिक कैलोरी बर्न कर सकते हैं

-बैली को एक शेप प्रदान करता

-चेहरे पर झुर्रियां नहीं आती और स्किन भी ग्लो करती है। इसे करने से ब्लड सरकुलेशन अच्छा रहता है

-सेक्सुअल फंक्शन में भी सुधार करता है