Thursday, November 3, 2022

 



तुलसी कौन थी?

देव-उठावनी एकादशी के दिन तुलसी विवाह की परंपरा को जाने-


तुलसी(पौधा) पूर्व जन्म मे एक लड़की थी जिस का नाम वृंदा था, राक्षस कुल में उसका जन्म हुआ था बचपन से ही भगवान विष्णु की भक्त थी.बड़े ही प्रेम से भगवान की सेवा, पूजा किया करती थी.जब वह बड़ी हुई तो उनका विवाह राक्षस कुल में दानव राज जलंधर से हो गया। जलंधर समुद्र से उत्पन्न हुआ था.

वृंदा बड़ी ही पतिव्रता स्त्री थी सदा अपने पति की सेवा किया करती थी.

एक बार देवताओ और दानवों में युद्ध हुआ जब जलंधर युद्ध पर जाने लगे तो वृंदा ने कहा -

स्वामी आप युद्ध पर जा रहे है आप जब तक युद्ध में रहेगे में पूजा में बैठ कर आपकी जीत के लिये अनुष्ठान करुगी,और जब तक आप वापस नहीं आ जाते, मैं अपना संकल्प

नही छोडूगी। जलंधर तो युद्ध में चले गये,और वृंदा व्रत का संकल्प लेकर पूजा में बैठ गयी, उनके व्रत के प्रभाव से देवता भी जलंधर को ना जीत सके, सारे देवता जब हारने लगे तो विष्णु जी के पास गये।

सबने भगवान से प्रार्थना की तो भगवान कहने लगे कि – वृंदा मेरी परम भक्त है में उसके साथ छल नहीं कर सकता ।

फिर देवता बोले - भगवान दूसरा कोई उपाय भी तो नहीं है अब आप ही हमारी मदद कर सकते है।

भगवान ने जलंधर का ही रूप रखा और वृंदा के महल में पँहुच गये जैसे

ही वृंदा ने अपने पति को देखा, वे तुरंत पूजा मे से उठ गई और उनके चरणों को छू लिए,जैसे ही उनका संकल्प टूटा, युद्ध में देवताओ ने जलंधर को मार दिया और उसका सिर काट कर अलग कर दिया,उनका सिर वृंदा के महल में गिरा जब वृंदा ने देखा कि मेरे पति का सिर तो कटा पडा है तो फिर ये जो मेरे सामने खड़े है ये कौन है?

उन्होंने पूँछा - आप कौन हो जिसका स्पर्श मैने किया, तब भगवान अपने रूप में आ गये पर वे कुछ ना बोल सके,वृंदा सारी बात समझ गई, उन्होंने भगवान को श्राप दे दिया आप पत्थर के हो जाओ, और भगवान तुंरत पत्थर के हो गये।

सभी देवता हाहाकार करने लगे लक्ष्मी जी रोने लगे और प्रार्थना करने लगे यब वृंदा जी ने भगवान को वापस वैसा ही कर दिया और अपने पति का सिर लेकर वे

सती हो गयी।

उनकी राख से एक पौधा निकला तब

भगवान विष्णु जी ने कहा –आज से

इनका नाम तुलसी है, और मेरा एक रूप इस पत्थर के रूप में रहेगा जिसे शालिग्राम के नाम से तुलसी जी के साथ ही पूजा जायेगा और में

बिना तुलसी जी के भोग

स्वीकार नहीं करुगा। तब से तुलसी जी कि पूजा सभी करने लगे। और तुलसी जी का विवाह शालिग्राम जी के साथ कार्तिक मास में

किया जाता है.देव-उठावनी एकादशी के दिन इसे तुलसी विवाह के रूप में मनाया जाता है !


Tuesday, October 25, 2022




बिहार आने वाले यात्रियों के लिए खुशखबरी.....छठ को लेकर रेलवे ने कई ट्रेन की शुरूआत....देख लें पूरी लिस्ट


छठ महापर्व के दौरान देश के विभिन्न शहरों से बिहार आने एवं छठ महापर्व के उपरांत वापसी यात्रा हेतु यात्रियों की सुविधा के मद्देनजर पूर्व मध्य रेल के विभिन्न स्टेशनों के लिए 124 पूजा स्पेशल ट्रेनों का परिचालन किया जा रहा है जिनका विवरण निम्नानुसार है -


पटना/दानापुर/पाटलिपुत्र/गया तक आने एवं जाने वाली पूजा स्पेशल ट्रेनें:.


1.04066 दिल्ली-पटना पूजा स्पेशल 27 एवं 29 अक्टूबर को दिल्ली से 23.10 बजे खुलकर अगले दिन 15.45 बजे पटना पहुंचेगी । 


2.04065 पटना-दिल्ली पूजा स्पेशल 26, 28 एवं 30 अक्टूबर को पटना से 16.50 बजे खुलकर अगले दिन 10.35 बजे दिल्ली पहुंचेगी ।


3.04076 अमृतसर-पटना पूजा स्पेशल 26 अक्टूबर को अमृतसर से 14.50 बजे खुलकर अगले दिन 15.45 बजे पटना पहुंचेगी । 


4.04075 पटना-अमृतसर पूजा स्पेशल 27 अक्टूबर को पटना से 16.50 बजे खुलकर अगले दिन 18.00 बजे अमृतसर पहुंचेगी ।


5.08109 सांतरागाछी-पटना पूजा स्पेशल दिनांक 28.10.2022 को सांतरागाछी से  14.55 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.30 बजे पटना पहुंचेगी । 


6. 08110 पटना-सांतरागाछी पूजा स्पेशल 29.10.2022 को पटना से 11.30 बजे खुलकर अगले दिन 04.20 बजे सांतरागाछी पहुंचेगी ।  


7. 04678 फिरोजपुर कैंट-पटना पूजा स्पेशल दिनांक  28.10.2022 को फिरोजपुर कैंट से 13.25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 17.00 बजे पटना  पहुंचेगी । 


8.04677 पटना-फिरोजपुर कैंट पूजा स्पेशल 26.10.2022 एवं 29.10.2022 को पटना से 19.00 बजे खुलकर अगले दिन 22.15 बजे फिरोजपुर कैंट पहुंचेगी ।


9.04072 दिल्ली-पटना पूजा स्पेशल 29.10.2022 को दिल्ली से 00.05 बजे प्रस्थान कर उसी तिथि को 15.45 बजे पटना पहुंचेगी । 


10.04071 पटना-दिल्ली पूजा स्पेशल 29.10.2022 को पटना से 18.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.20 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


11.04018 दिल्ली-पटना पूजा स्पेशल 28.10.2022 को दिल्ली से 00.05 बजे प्रस्थान कर उसी तिथि को 15.45 बजे पटना पहुंचेगी ।


12.04017 पटना-दिल्ली पूजा स्पेशल 28.10.2022 को पटना से 18.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.20 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


13.01663 रानी कमलापति (भोपाल)-दानापुर पूजा स्पेशल दिनांक 26 एवं 31 अक्टूबर को रानी कमलापति (भोपाल) से 14.20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 08.45 बजे दानापुर पहुंचेगी । 


14.01664 दानापुर-रानी कमलापति पूजा स्पेशल 27 अक्टूबर एवं 01 नवंबर को दानापुर से 12.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 09.50 बजे रानी कमलापति पहुंचेगी ।


15.01705 जबलपुर-दानापुर पूजा स्पेशल 27.10.22 को जबलपुर से 19.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 08.45 बजे दानापुर पहुंचेगी । 


16.  01706 दानापुर-जबलपुर पूजा स्पेशल 28.10.22 को दानापुर से 12.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 04.15 बजे जबलपुर पहुंचेगी ।


17. 08624 रांची-पटना स्पेशल ट्रेन रांची से 29.10.2022 को 23.10 बजे खुलकर  10.30 बजे पटना जं. पहुंचेगी । 


18.08623 पटना-रांची स्पेशल ट्रेन पटना से 30.10.2022 को पटना से 11.30 बजे खुलकर 20.35 बजे रांची पहुंचेगी ।


19. 02250 नई दिल्ली-पटना फेस्टिवल स्पेशल राजधानी एक्सप्रेस नई दिल्ली से  27.10.2022 को 19.10 बजे खुलकर अगले दिन 06.50 बजे पटना जं. पहुंचेगी ।


20.09461 अहमदाबाद-पटना स्पेशल 27.10.2022 एवं 03.11.2022 को 19.25 बजे खुलकर शनिवार को 00.30 बजे पटना पहुंचेगी । 


21.  09462 पटना-नांदेड़ स्पेशल 29.10.2022 एवं 05.11.2022 को पटना से 06.00 बजे खुलकर रविवार को 10.15 बजे नांदेड़ पहुंचेगी।


22.   09467 अहमदाबाद-पटना स्पेशल 28.10.2022 को 16.25 बजे खुलकर शनिवार को 21.15 बजे पटना पहुंचेगी । 


23.  09468 पटना-नांदेड़ स्पेशल 30.10.2022 को पटना से 06.00 बजे खुलकर अगले दिन 10.15 बजे नांदेड़ पहुंचेगी।


24.   09321 इंदौर-पाटलिपुत्र स्पेशल 28.10.2022 एवं 04.11.2022 को 13.55 बजे खुलकर शनिवार को 14.55 बजे पाटलिपुत्र पहुंचेगी ।


25.   09322 पाटलिपुत्र-इंदौर स्पेशल 29.10.2022 एवं 05.11.2022 को पाटलिपुत्र से 18.30 बजे खुलकर रविवार को 20.05 बजे इंदौर पहुंचेगी।


26.   09323 इंदौर-पाटलिपुत्र स्पेशल 31.10.2022 को 11.15 बजे खुलकर मंगलवार को 13.40 बजे पाटलिपुत्र पहुंचेगी । 


27.   09324 पाटलिपुत्र-इंदौर स्पेशल 01.11.2022 को पाटलिपुत्र से 17.00 बजे खुलकर बुधवार को 20.30 बजे इंदौर पहुंचेगी।


28.   08624 रांची-पटना छठ स्पेशल ट्रेन रांची से 29.10.2022 को 23.10 बजे खुलकर अगले दिन 10.30 बजे पटना जं. पहुंचेगी । 


29.   08623 पटना-रांची स्पेशल ट्रेन पटना से 30.10.2022 को पटना से 11.30 बजे खुलकर उसी दिन 20.35 बजे रांची पहुंचेगी । 


30.   01410 दानापुर-पुणे सुपरफास्ट छठ स्पेशल दानापुर से 27.10.2022 को 11.00 बजे खुलकर अगले दिन 16.30 बजे पुणे पहुंचेगी ।


31.   01408 दानापुर-पुणे अनारक्षित छठ सुपरफास्ट स्पेशल से दिनांक 26.10.2022 को 11.00 बजे खुलकर अगले दिन 16.30 बजे पुणे पहुंचेगी ।


32.   09031 उधना-दानापुर छठ स्पेशल उधना से 26.10.2022 को 20.35 बजे खुलकर अगले दिन 23.30 बजे दानापुर पहुंचेगी ।


33.   09032 दानापुर-उधना छठ स्पेशल दानापुर से 28.10.2022 को 02.30 बजे खुलकर अगले दिन 05.10 बजे उधना पहुंचेगी ।


34.   09035 उधना-दानापुर छठ स्पेशल उधना से 26.10.2022 को 08.35 बजे खुलकर अगले दिन 11.30 बजे दानापुर पहुंचेगी ।


35.   09036 दानापुर-उधना छठ स्पेशल दानापुर से 27.10.2022 को 14.30 बजे खुलकर अगले दिन 19.05 बजे दानापुर पहुंचेगी ।


36.   03255 पटना-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 07.11.2022 तक प्रतिदिन पटना से 10.00 बजे प्रस्थान कर उसी तिथि को 23.40 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी । 


37.  03256 आनंद विहार टर्मिनस-पटना पूजा स्पेशल 08.11.2022 तक प्रतिदिन आनंद विहार टर्मिनस से 01.00 बजे प्रस्थान कर उसी तिथि को 14.45 बजे पटना  पहुंचेगी।


38.   02249 पटना-नई दिल्ली फेस्टिवल राजधानी स्पेशल पटना से दिनांक 01.11.2022 को 09.00 बजे खुलकर पं.दीनदयाल उपाध्याय जं., प्रयागराज, कानपुर सेंट्रल, रूकते हुए उसी दिन 20.55 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी ।


39.   03281 पटना-सिकंदराबाद पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक गुरूवार को पटना से 16.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 23.55 बजे सिकंदराबाद पहुंचेगी ।


40. 03282 सिकंदराबाद-पटना पूजा स्पेशल 12.11.2022 तक प्रत्येक शनिवार को सिकंदराबाद से 15.25 बजे प्रस्थान कर सोमवार को 00.30 बजे पटना पहुंचेगी।


41.   09417 अहमदाबाद-पटना पूजा स्पेशल 28.11.2022 तक प्रत्येक सोमवार को अहमदाबाद से 09.10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 21.00 बजे पटना पहुंचेगी ।


42.   09418 पटना-अहमदाबाद पूजा स्पेशल 29.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार को पटना से 23.45 बजे प्रस्थान कर गुरूवार को 11.20 बजे अहमदाबाद पहुंचेगी ।


43.   03215 पटना-थावे स्पेशल 13.11.2022 तक प्रतिदिन पटना से 12.10 बजे खुलकर 17.40 बजे थावे जं. पहुंचेगी ।


44.  03216 थावे-पटना स्पेशल 13.11.2022 तक प्रतिदिन थावे जं. से 18.25 बजे खुलकर 23.45 बजे पटना पहुंचेगी ।


45.   03230 पटना-पुरी पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक गुरूवार को पटना से 08.45 बजे खुलकर अगले दिन 02.55 बजे पुरी पहुंचेगी । 


46.   03229 पुरी-पटना पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक शुक्रवार को पुरी से 14.55 बजे खुलकर अगले दिन 09.35 बजे पटना पहुंचेगी ।


47.   03257 पटना-आनंद विहार पूजा स्पेशल 13.11..2022 तक प्रत्येक गुरूवार एवं रविवार को पटना से 22.20 बजे खुलकर अगले दिन 15.15 बजे आनंद विहार पहुंचेगी । 


48.   03258 आनंद विहार-पटना पूजा स्पेशल 14.11.2022 तक प्रत्येक शुक्रवार एवं सोमवार को आनंद विहार से 23.30 बजे खुलकर अगले दिन 17.30 बजे पटना पहुंचेगी ।


49.   01678 नई दिल्ली-गया पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को नई दिल्ली से 08.10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 00.30 बजे गया पहुंचेगी ।


50.   01677 गया-नई दिल्ली पूजा सुपर फास्ट स्पेशल ट्रेन 12.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शनिवार को गया से 07.10 बजे प्रस्थान कर 23.35 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी ।


मुजफ्फरपुर/समस्तीपुर/बरौनी तक आने/जाने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन


1. 04054 आनंद विहार टर्मिनस-मुजफ्फरपुर पूजा स्पेशल दिनांक 28.10.2022 को आनंद विहार टर्मिनस से 12.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.25 बजे मुजफ्फरपुर पहुंचेगी ।


2. 04053 मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 29.10.2022 को मुजफ्फरपुर से 13.00 बजे खुलकर अगले दिन 10.10 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी । 


3. 04082 आनंद विहार टर्मिनस-मुजफ्फरपुर पूजा स्पेशल दिनांक 27.10.2022 को आनंद विहार टर्मिनस से 12.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.25 बजे मुजफ्फरपुर पहुंचेगी ।


4. 04081 मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 28.10.2022 को मुजफ्फरपुर से 13.00 बजे खुलकर अगले दिन 10.10 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी।


5. 04028 आनंद विहार टर्मिनस-मुजफ्फरपुर पूजा स्पेशल 26.10.2022 को आनंद विहार टर्मिनस से 12.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.25 बजे मुजफ्फरपुर पहुंचेगी ।


6. 04027 मुजफ्फरपुर-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 27.10.2022 को मुजफ्फरपुर से 13.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 10.10 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी ।


7. 01043 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-समस्तीपुर पूजा स्पेशल दिनांक 30.10.2022 तक प्रत्येक रविवार एवं गुरूवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 12.15 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 21.15 बजे समस्तीपुर पहुंचेगी । 


8. 01044 समस्तीपुर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस पूजा स्पेशल दिनांक 31.10.2022 तक प्रत्येक सोमवार एवं शुक्रवार को समस्तीपुर से 23.30 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन 07.40 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी । 


9. 04185 ग्वालियर-बरौनी फेस्टिवल स्पेशल ग्वालियर से 26.10.2022 एवं 30.10.2022 को 18.00 बजे खुलकर अगले दिन 18.30 बजे बरौनी पहुंचेगी । 


10.   04186 बरौनी-ग्वालियर फेस्टिवल स्पेशल ट्रेन बरौनी से 28.10.2022 एवं 01.11.2022 को बरौनी से 04.30 बजे खुलकर अगले दिन 04.15 बजे ग्वालियर पहुंचेगी । 


11.   01676 आनंद विहार-मुजफ्फरपुर पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक सोमवार एवं गुरूवार को आनंद विहार से 23.15 बजे खुलकर अगले दिन 21.40 बजे मुजफ्फरपुर पहुंचेगी ।


12.   01675 मुजफ्फरपुर-आनंद विहार पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को 23.45 बजे खुलकर अगले दिन 23.30 बजे आनंद विहार पहुंचेगी ।


13.   04646 जम्मूतवी-बरौनी पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक गुरूवार को जम्मूतवी से 05.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 11.45 बजे बरौनी पहुंचेगी ।


14.   04645 बरौनी-जम्मूतवी पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक शुक्रवार को बरौनी से   16.00 बजे प्रस्थान कर 20.45 बजे जम्मूतवी पहुंचेगी ।


15.   04040 नई दिल्ली-बरौनी पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को नई दिल्ली से 19.25 बजे खुलकर अगले दिन 16.00 बजे बरौनी पहुंचेगी । 


16.   04039 बरौनी-नई दिल्ली पूजा स्पेशल 12.11.2022 तक प्रत्येक बुधवार एवं शनिवार को बरौनी 19.40 बजे खुलकर अगले दिन 16.40 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी । 


दरभंगा/सहरसा/सीतामढ़ी/रक्सौल तक आने/जाने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन -


1. 04004 दिल्ली-दरभंगा पूजा स्पेशल दिनांक 28.10.2022 को दिल्ली से 14.20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 15.45 बजे दरभंगा पहुंचेगी । 


2. 04003 दरभंगा-दिल्ली पूजा स्पेशल 29.10.2022 को दरभंगा से 18.20 बजे खुलकर अगले दिन 19.55 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


3. 04060 दिल्ली-दरभंगा पूजा स्पेशल 26.10.2022 को दिल्ली से 14.20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 15.45 बजे दरभंगा पहुंचेगी ।


4. 04059 दरभंगा-दिल्ली पूजा स्पेशल 27.10.2022 को दरभंगा से 18.20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन19.55 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


5. 04032 दिल्ली-दरभंगा पूजा स्पेशल दिनांक 27.10.2022 को दिल्ली से 14.20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 15.45 बजे दरभंगा पहुंचेगी ।


6. 04031 दरभंगा-दिल्ली पूजा स्पेशल 28.10.2022 को दरभंगा से 18.20 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 19.55 बजे दिल्ली पहुंचेगी।


7. 08626 हटिया-दरभंगा छठ स्पेशल ट्रेन हटिया से 27.10.2022 को 23.45 बजे खुलकर अगले दिन 14.30 बजे दरभंगा जं. पहुंचेगी । 


8.  08625 दरभंगा-हटिया छठ स्पेशल ट्रेन दरभंगा से 28.10.2022 को दरभंगा से 16.30 बजे खुलकर अगले दिन 08.30 बजे हटिया पहुंचेगी ।


9. 04052 आनंद विहार टर्मिनस-सहरसा पूजा स्पेशल दिनांक 27.10.2022 को आनंद विहार टर्मिनस से 15.25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 16.00 बजे सहरसा पहुंचेगी । 


10.   04051 सहरसा-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 28.10.2022 को सहरसा से  19.00 बजे खुलकर अगले दिन 20.10 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी ।


11.  04068 नई दिल्ली-सहरसा पूजा स्पेशल दिनांक 26 एवं 29 अक्टूबर को नई दिल्ली से 00.05 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 03.30 बजे सहरसा पहुंचेगी । 


12.   04067 सहरसा-नई दिल्ली पूजा स्पेशल 27 एवं 30 अक्टूबर को सहरसा से  07.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 07.10 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी । 


13.   04016 आनंद विहार टर्मिनस-सहरसा पूजा स्पेशल 26.10.2022 को आनंद विहार टर्मिनस से 15.25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 16.00 बजे सहरसा पहुंचेगी ।


14.   04015 सहरसा-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 27.10.2022 को सहरसा से 19.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 20.10 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी । 


15.   04062 आनंद विहार टर्मिनस-सहरसा पूजा स्पेशल 28 अक्टूबर को आनंद विहार टर्मिनस से 15.25 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 16.00 बजे सहरसा पहुंचेगी । 


16.   04061 सहरसा-आनंद विहार टर्मिनस पूजा स्पेशल 26 एवं 29 अक्टूबर को सहरसा से 19.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 20.10 बजे आनंद विहार टर्मिनस पहुंचेगी । 


17.   04012 नई दिल्ली-दरभंगा पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक सोमवार एवं गुरूवार को नई दिल्ली से 19.25 बजे खुलकर अगले दिन 16.30 बजे दरभंगा पहुंचेगी । 


18.   04011 दरभंगा-नई दिल्ली पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को दरभंगा से 18.00 बजे खुलकर अगले दिन 16.40 बजे नई दिल्ली पहुंचेगी ।  


19.   05527 दरभंगा-आनंद विहार पूजा स्पेशल 13.11.2022 तक प्रत्येक गुरूवार एवं रविवार को । 


20.   05528 आनंद विहार-दरभंगा पूजा स्पेशल 14.11.2022 तक प्रत्येक शुक्रवार एवं सोमवार को आनंद विहार से 15.30 बजे खुलकर अगले दिन 15.45 बजे दरभंगा पहुंचेगी।


21.  05521 सहरसा-अंबाला पूजा स्पेशल 11.11..2022 तक प्रत्येक शुक्रवार एवं मंगलवार को सहरसा से 09.20 बजे खुलकर अगले दिन 12.30 बजे अंबाला  पहुंचेगी । 


22.   05522 अंबाला-सहरसा पूजा स्पेशल 12.11.2022 तक प्रत्येक शनिवार एवं बुधवार को अंबाला से 15.30 बजे खुलकर अगले दिन 18.10 बजे सहरसा पहुंचेगी ।


23.   01662 आनंद विहार-सहरसा पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक सोमवार एवं गुरूवार को आनंद विहार से 11.10 बजे खुलकर अगले दिन 11.30 बजे सहरसा पहुंचेगी । 


24.   01661 सहरसा-आनंद विहार पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को सहरसा से 14.30 बजे खुलकर अगले दिन 13.55 बजे आनंद विहार पहुंचेगी ।


25.   05529 जयनगर-लोकमान्य तिलक टर्मिनस पूजा स्पेशल 08.11. 2022 तक प्रत्येक मंगलवार को जयनगर से 23.50 बजे खुलकर अगले दिन 13.00 बजे लोकमान्य तिलक टर्मिनस पहुंचेगी । 


26.   05530 लोकमान्य तिलक टर्मिनस-जयनगर पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक शुक्रवार को लोकमान्य तिलक टर्मिनस से 00.15 बजे खुलकर अगले दिन 15.00 बजे जयनगर पहुंचेगी ।


27.   04010 आनंद विहार-जोगबनी पूजा स्पेशल 08.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार को आनंद विहार से 23.45 बजे खुलकर अगले दिन 05.20 बजे जोगबनी पहुंचेगी । 


28.   04009 जोगबनी-आनंद विहार पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक गुरूवार को जोगबनी से 09.00 बजे खुलकर अगले दिन 16.05 बजे आनंद विहार पहुंचेगी ।


29.   01668 आनंद विहार-जयनगर पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक मंगलवार एवं शुक्रवार को आनंद विहार से 10.30 बजे खुलकर अगले दिन 13.15 बजे जयनगर पहुंचेगी । 


30.   01667 जयनगर-आनंद विहार पूजा स्पेशल 12.11.2022 तक प्रत्येक बुधवार एवं शनिवार को जयनगर से 15.00 बजे खुलकर अगले दिन 19.00 बजे आनंद विहार पहुंचेगी ।


31. 05508 रक्सौल-कोलकाता पूजा स्पेशल 09.11.2022 तक प्रत्येक सोमवार एवं बुधवार को रक्सौल से 21.00 बजे खुलकर अगले दिन 13.30 बजे कोलकाता पहुंचेगी ।


32.   05507 कोलकाता-रक्सौल पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक मंगलवार एवं गुरूवार को कोलकाता से 15.50 बजे खुलकर अगले दिन 07.30 बजे रक्सौल पहुंचेगी ।


33.   03317 धनबाद-सीतामढ़ी पूजा स्पेशल 12.11.2022 तक प्रत्येक शनिवार को धनबाद से 20.00 बजे खुलकर अगले दिन 06.30 बजे सीतामढ़ी पहुंचेगी । 


34.   03318 सीतामढ़ी-धनबाद पूजा स्पेशल 13.11.2022 तक प्रत्येक रविवार को सीतामढ़ी से 09.30 बजे खुलकर अगले दिन 21.25 बजे धनबाद पहुंचेगी ।


पूर्व मध्य रेल के विभिन्न स्टेशनों से गुजरने वाली पूजा स्पेशल ट्रेन:


1. 05978 डिब्रूगढ़-गोरखपुर छठ स्पेशल डिब्रूगढ़ से 27.10.2022 को 19.25 बजे खुलकर शुक्रवार को 23.30 बजे समस्तीपुर एवं शनिवार को 01.35 बजे हाजीपुर रूकते हुए 07.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी । 


2. 05777 गोरखपुर-न्यू जलपाईगुड़ी छठ स्पेशल ट्रेन गोरखपुर से 29.10.2022 को  17.00 बजे खुलकर 21.10 बजे हाजीपुर रूकते हुए 30.10.2022 को 09.30 बजे न्यू जलपाईगुड़ी पहुंचेगी ।


3. 05778 न्यू जलपाईगुड़ी-गोरखपुर छठ स्पेशल 31.10.2022 को न्यू जलपाईगुड़ी से 14.00 बजे खुलकर 23.00 बजे हाजीपुर रूकते हुए अगले दिन 04.30 बजे गोरखपुर पहुंचेगी ।


4. 09011 मुंबई सेंट्रल-मालदा टाउन सुपरफास्ट स्पेशल मुंबई सेंट्रल से 30.10.2022 को  22.50 बजे खुलकर मंगलवार को 10.30 बजे मुजफ्फरपुर रूकते हुए 18.45 बजे मालदा टाउन पहुंचेगी।


5. 09012 मालदा टाउन-मुंबई सेंट्रल सुपरफास्ट स्पेशल ट्रेन 26.10.2022 एवं  02.11.2022 को मालदा टाउन से 05.00 बजे खुलकर 14.00 बजे मुजफ्फरपुर रूकते हुए शुक्रवार को 05.05 बजे मुंबई सेंट्रल पहुंचेगी ।


6. 03435 मालदा टाउन-आनंद विहार छठ स्पेशल मालदा टाउन से दिनांक 31.10.2022 एवं 07.11.2022 को 09.05 बजे खुलकर 17.55 बजे पटना रूकते हुए मंगलवार को    13.45 बजे आनंद विहार पहुंचेगी । 


7. गाड़ी संख्या 01032 मालदा टाउन-छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पूजा स्पेशल दिनांक 26.10.2022 को मालदा टाउन से 12.20 बजे प्रस्थान कर दूसरे दिन 03.50 बजे छत्रपति शिवाजी महाराज टर्मिनस पहुंचेगी । 


8. 04036 दिल्ली-भागलपुर पूजा स्पेशल दिनांक 28.10.2022 को दिल्ली से 09.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 07.00 बजे भागलपुर पहुंचेगी । 


9. 04035 भागलपुर-दिल्ली पूजा स्पेशल 29.10.2022 को भागलपुर से 09.45 बजे खुलकर अगले दिन 06.45 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


10.   04058 दिल्ली-भागलपुर पूजा स्पेशल 26.10.2022 को दिल्ली से 09.00 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 07.00 बजे भागलपुर पहुंचेगी । 


11.   04057 भागलपुर-दिल्ली पूजा स्पेशल 27.10.2022 को भागलपुर से 09.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 06.45 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


12.   04033 भागलपुर-दिल्ली पूजा स्पेशल 26.10.2022 को भागलपुर से 09.45 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 06.45 बजे दिल्ली पहुंचेगी । 


13. 04680 अमृतसर-कटिहार पूजा स्पेशल दिनांक 27.10.2022 को अमृतसर से 08.10 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 16.30 बजे कटिहार पहुंचेगी । 


14.  04679 कटिहार-अमृतसर पूजा स्पेशल 28.10.2022 को कटिहार से 20.00 बजे खुलकर अगले दिन 04.30 बजे अमृतसर जंक्शन पहुंचेगी ।


15.   04316 देहरादून-हावड़ा पूजा स्पेशल दिनांक 27.10.2022 को देहरादून से 00.30 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 09.15 बजे हावड़ा पहुंचेगी । 


16.   04315 हावड़ा-देहरादून पूजा स्पेशल 28.10.2022 को हावड़ा से 12.30 बजे खुलकर अगले दिन 20.00 बजे देहरादून पहुंचेगी । 


17.   08117 शालिमार-बढ़नी पूजा स्पेशल दिनांक 27.10.2022 को शालिमार से 19.55 बजे प्रस्थान कर अगले दिन 22.00 बजे बढ़नी पहुंचेगी ।


18.   08118 बढ़नी-शालिमार पूजा स्पेशल 29.10.2022 को बढ़नी से 08.00 बजे खुलकर अगले दिन 10.00 बजे शालिमार पहुंचेगी ।


19. 05977 गोरखपुर-डिब्रूगढ़ छठ स्पेशल 01.11.2022  को गोरखपुर से 07.50 बजे खुलकर 13.35 बजे हाजीपुर रूकते हुए अगले दिन 20.50 बजे डिब्रूगढ़ पहुंचेगी ।


20.   03436 आनंद विहार-मालदा टाउन छठ स्पेशल ट्रेन दिनांक 01.11.2022 एवं   08.11.2022 को आनंद विहार से 17.10 बजे खुलकर बुधवार को 14.30 बजे पटना रूकते हुए 23.50 बजे मालदा टाउन पहुंचेगी । 


21.   04002 आनंद विहार-भागलपुर पूजा स्पेशल 10.11.2022 तक प्रत्येक गुरूवार को आनंद विहार से 19.05 बजे खुलकर अगले दिन 18.00 बजे भागलपुर पहुंचेगी । 


22.  04001 भागलपुर-आनंद विहार पूजा स्पेशल 11.11.2022 तक प्रत्येक शुक्रवार को भागलपुर से 19.45 बजे खुलकर अगले दिन 18.40 बजे आनंद विहार पहुंचेगी ।


23.   03169 कोलकाता-हरिद्वार पूजा स्पेशल 12.11.2022 तक प्रत्येक शनिवार को कोलकाता से 11.25 बजे खुलकर 21.30 बजे पटना रूकते हुए अगले दिन रविवार को 18.00 बजे हरिद्वार पहुंचेगी । 


24.  03170 हरिद्वार -कोलकाता पूजा स्पेशल 13.11.2022 तक प्रत्येक रविवार को हरिद्वार से 20.30 बजे खुलकर सोमवार को 15.20 बजे पटना रूकते हुए मंगलवार को 03.35 बजे कोलकाता पहुंचेगी ।

 


" सूर्य ग्रहण से सीख " 


सूर्य ग्रहण का पर्व मानव जीवन को तीन प्रमुख सीखें प्रदान करता है। 

 पहली - इस सृष्टि में सब कुछ परिवर्तनशील है। इस भू मण्डल पर शाश्वत जैसा कुछ भी नहीं। समस्त चराचर जगत को प्रकाशित करने वाले सूर्य देव की किरणों को भी कुछ समय के लिए ही सही मगर पृथ्वी तक पहुँचने में असमर्थता हो जाती है अथवा पृथ्वी से सूर्य किरणों का ह्रास हो जाता है। 

 दूसरी - जीवन में सदैव अवरोध आते रहेंगे। यात्रा जितनी लंबी होगी अथवा लक्ष्य जितना श्रेष्ठ होगा अवरोध भी उतने ही उत्पन्न होंगे। बस उन क्षणों में धैर्य का परिचय देते हुए ये विचार करें कि जब सुख ही शाश्वत नहीं रहा तो दुख की क्या औकात है..? समय बुरा हो सकता है मगर जीवन कदापि नहीं। ये वक्त भी गुजर जायेगा, बस इतना ध्यान रहे। 

 तीसरी -  एक महत्वपूर्ण बात और वो ये कि जिस प्रकार सूर्य ग्रहण लगने पर भी मूल रूप से भगवान सूर्य नारायण में कोई परिवर्तन नहीं आता। दूर से देखने पर लगेगा कि सूर्य पर अंधेरा छा गया है जबकि यथार्थ में सूर्य की स्थिति सम बनी रहती है। ऐसे ही जीवन के सुख - दुख, मान - अपमान, अनुकूलता - प्रतिकूलता एवं यश - अपयश में आत्मा भी निर्लेप ही रहती है।

 जीवन में बाहरी स्थितियाँ अवश्य परिवर्तनशील हैं मगर आत्मा सदैव इन सब से परे अपनी आनंद अवस्था में ही रहती है। बस हमारी दृष्टि बदल जाए और ये भीतर का शाश्वत आनंद हमारे जीवन में भी छलक पड़े।

Tuesday, October 11, 2022

 


                                                            Tongue exercise 


The tongue exercise is effective to reduce the onset of Alzheimer's and is also useful to reduce / improve

1 Body weight

2 Hypertension

3 Blood-Clot in Brain 

4 Asthma

5 Far-sightedness

6 Ear buzzing

7 Throat infection

8 Shoulder / Neck infection

9 Insomia


The moves  are very simple and easy to learn

Each morning, when you wash your face, in front of a mirror, do the exercise as below :

stretch out your tongue and move it to the right then to the left for 10 times

Since I started exercising my tongue daily,  there was improvement in my Brain Retention. 

My mind was clear and fresh and there were other improvements too...

   1 Far sightedness     

   2  No giddiness 

   3. Improved wellness

   4. Better digestion 

   5. Lesser flu / cold 

I am stronger and more agile.

The tongue exercise helps to control and prevent Alzheimer's...

Medical research has found that the tongue has connection with the BIG Brain. When our body becomes old and weak, the first sign to appear is that our tongue becomes stiff and often we tend to bite ourselves.

Frequently exercising your tongue 

will stimulate the brain, 

help to reduce our thoughts from shrinking and thus achieve a healthier body.


 


                    Papaya is the king of fruits

 In the future, the new treatment method for malignant tumors is no longer chemotherapy, radiotherapy or surgery, but changing one's diet to improve the new blood vessels!

Great medical knowledge!  A high-quality diet is the natural chemotherapy three times a day.  The following information should be taken seriously, it is simple and easy to implement, and it is very good!

What you may not know is: Papaya, which we usually find strange and easy to obtain, is the king of fruits!  The tomato that the doctor praised was nothing compared to papaya.  Papaya has been selected by WHO (World Health Organization) as the fruit with the highest nutritional value for two consecutive years, that is, the king of fruits!

The nutritional value of papaya is:

1. Calcium: papaya is 2 times that of apples.

 2. Vitamin C: papaya is 13 times that of apples, 7 times that of bananas, 7 times that of watermelon, 8 times that of cherries, and 1.3 times that of pineapples.

 3. Vitamin A: papaya is 10 times that of kiwi, 18 times that of apple, 1.5 times that of guava, 15 times that of banana, 1.5 times that of watermelon, 15 times that of cherries, and 16 times that of pineapple.

 4. Vitamin K: papaya is 5 times that of bananas, 2.5 times that of watermelon, and 4 times that of pineapples.

 Great again!  related to eye protection...

 5. Carotenoids, lycopene, B carotene, lutein and zeaxanthin, etc.:

Papaya is 2000 times bigger than kiwi!  Kiwis, apples, cherries, pineapples, bananas, guava, none of these ingredients.

Great!  The above data source is the United States Department of Agriculture (USDA) 2016.

 


Thursday, September 29, 2022

 

                        9 औषधियों के पेड़ पौधे जिन्हें नवदुर्गा कहा गया है -



(1) प्रथम शैलपुत्री (हरड़) : कई प्रकार के रोगों में काम आने वाली औषधि हरड़ हिमावती है जो देवी शैलपुत्री का ही एक रूप है.यह आयुर्वेद की प्रधान औषधि है यह पथया, हरीतिका, अमृता, हेमवती, कायस्थ, चेतकी और श्रेयसी सात प्रकार की होती है.


(2) ब्रह्मचारिणी (ब्राह्मी) : ब्राह्मी आयु व याददाश्त बढ़ाकर, रक्तविकारों को दूर कर स्वर को मधुर बनाती है.इसलिए इसे सरस्वती भी कहा जाता है.


(3) चंद्रघंटा (चंदुसूर) : यह एक ऎसा पौधा है जो धनिए के समान है. यह औषधि मोटापा दूर करने में लाभप्रद है इसलिए इसे चर्महंती भी कहते हैं.


(4) कूष्मांडा (पेठा) : इस औषधि से पेठा मिठाई बनती है.इसलिए इस रूप को पेठा कहते हैं. इसे कुम्हड़ा भी कहते हैं जो रक्त विकार दूर कर पेट को साफ करने में सहायक है. मानसिक रोगों में यह अमृत समान है. आज कल सैक्रीन से बनने वाला पेठा नहीं खाये घर में बनाये


(5) स्कंदमाता (अलसी) : देवी स्कंदमाता औषधि के रूप में अलसी में विद्यमान हैं. यह वात, पित्त व कफ रोगों की नाशक औषधि है.इसमे फाइबर की मात्रा ज्यादा होने से इसे सभी को भोजन के पश्चात काले नमक से भूंजकर प्रतिदिन सुबह शाम लेना चाहिए यह खून भी साफ करता है


(6) कात्यायनी (मोइया) : देवी कात्यायनी को आयुर्वेद में कई नामों से जाना जाता है जैसे अम्बा, अम्बालिका व अम्बिका, इसके अलावा इन्हें मोइया भी कहते हैं.यह औषधि कफ, पित्त व गले के रोगों का नाश करती है.


(7) कालरात्रि (नागदौन) : यह देवी नागदौन औषधि के रूप में जानी जाती हैं.यह सभी प्रकार के रोगों में लाभकारी और मन एवं मस्तिष्क के विकारों को दूर करने वाली औषधि है.यह पाइल्स के लिये भी रामबाण औषधि है इसे स्थानीय भाषा जबलपुर में दूधी कहा जाता है 


(8) महागौरी (तुलसी) : तुलसी सात प्रकार की होती है सफेद तुलसी, काली तुलसी, मरूता, दवना, कुढेरक, अर्जक और षटपत्र. ये रक्त को साफ कर ह्वदय रोगों का नाश करती है. एकादशी को छोडकर प्रतिदिन सुबह ग्रहण करना चाहिए


(9) सिद्धिदात्री (शतावरी) : दुर्गा का नौवां रूप सिद्धिदात्री है जिसे नारायणी शतावरी कहते हैं. यह बल, बुद्धि एवं विवेक के लिए उपयोगी है.विशेषकर प्रसूताओं (जिन माताओं को ऑपरेशन के पश्चात अथवा कम दूध आता है) उनके लिए यह रामबाण औषधि है को इसका सेवन करना चाहिए   

 शक्ति संचय, साधना, उपासना का  का काल है नवरात्रि

नवरात्र शब्द से 'नव अहोरात्रों (विशेष रात्रियां) का बोध' होता है। इस समय शक्ति के नव रूपों की उपासना की जाती है क्योंकि 'रात्रि' शब्द सिद्धि का प्रतीक माना जाता है।

 *भारत के प्राचीन ऋषि-मुनियों ने रात्रि को दिन की अपेक्षा अधिक महत्व दिया है। 

 इन नवरात्रों में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति संचय करने के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। यहां तक कि कुछ साधक इन रात्रियों में पूरी रात पद्मासन या सिद्धासन में बैठकर आंतरिक त्राटक या बीज मंत्रों के जाप द्वारा विशेष सिद्धियां प्राप्त करने का प्रयास करते हैं। नवरात्रों में शक्ति के ५१ पीठों पर भक्तों का समुदाय बड़े उत्साह से शक्ति की उपासना के लिए एकत्रित होता है और जो उपासक इन शक्ति पीठों पर नहीं पहुंच पाते वे अपने निवास स्थल पर ही शक्ति का आह्वान करते हैं।

* मनीषियों ने रात्रि के महत्व को अत्यंत सूक्ष्मता के साथ वैज्ञानिक परिप्रेक्ष्य में समझने और समझाने का प्रयत्न किया।* 

अब तो यह एक सर्वमान्य वैज्ञानिक तथ्य भी है कि रात्रि में प्रकृति के बहुत सारे अवरोध खत्म हो जाते हैं। हमारे ऋषि-मुनि आज से कितने ही हजारों-लाखों वर्ष पूर्व ही प्रकृति के इन वैज्ञानिक रहस्यों को जान चुके थे। आप अगर ध्यान दें तो पाएंगे कि अगर दिन में आवाज दी जाए, तो वह दूर तक नहीं जाती है, किंतु यदि रात्रि में आवाज दी जाए तो वह बहुत दूर तक जाती है। इसके पीछे दिन के कोलाहल के अलावा एक वैज्ञानिक तथ्य यह भी है कि दिन में सूर्य की किरणें आवाज की तरंगों और रेडियो तरंगों को आगे बढ़ने से रोक देती हैं

 *इसका वैज्ञानिक सिद्धांत यह है कि सूर्य की किरणें दिन के समय रेडियो तरंगों को जिस प्रकार रोकती हैं ठीक उसी प्रकार मंत्र जाप की विचार तरंगों में भी दिन के समय रुकावट पड़ती है। इसीलिए ऋषि-मुनियों ने रात्रि का महत्व दिन की अपेक्षा बहुत अधिक बताया है।

 मंदिरों में घंटे और शंख की आवाज के कंपन से दूर-दूर तक वातावरण कीटाणुओं से रहित हो जाता है। यही रात्रि का तर्कसंगत रहस्य है। जो इस वैज्ञानिक तथ्य को ध्यान में रखते हुए रात्रियों में संकल्प और उच्च अवधारणा के साथ अपनी शक्तिशाली विचार तरंगों को वायुमंडल में भेजते हैं, उनकी कार्यसिद्धि अर्थात मनोकामना सिद्धि, उनके शुभ संकल्प के अनुसार उचित समय और ठीक विधि के अनुसार करने पर अवश्य होती है।

वैज्ञानिक आधार नवरात्र के पीछे का वैज्ञानिक आधार यह है कि पृथ्वी द्वारा सूर्य की परिक्रमा काल में एक साल की चार संधियां हैं जिनमें से मार्च व सितंबर माह में पड़ने वाली गोल संधियों में साल के दो मुख्य नवरात्र पड़ते हैं। इस समय रोगाणु आक्रमण की सर्वाधिक संभावना होती है। ऋतु संधियों में अक्सर शारीरिक बीमारियां बढ़ती हैं। अत: उस समय स्वस्थ रहने के लिए तथा शरीर को शुद्ध रखने के लिए और तन-मन को निर्मल और पूर्णत: स्वस्थ रखने के लिए की जाने वाली प्रक्रिया का नाम 'नवरात्र' है। 

 रूपक के द्वारा हमारे शरीर को नौ मुख्य द्वारों वाला कहा गया है और, इसके भीतर निवास करने वाली जीवनी शक्ति का नाम ही दुर्गा देवी है।

इन मुख्य इन्द्रियों में अनुशासन, स्वच्छ्ता, तारतम्य स्थापित करने के प्रतीक रूप में, शरीर तंत्र को पूरे साल के लिए सुचारू रूप से क्रियाशील रखने के लिए नौ द्वारों की शुद्धि का पर्व नौ दिन मनाया जाता है।

Tuesday, September 20, 2022

 ऑटो राजनीति पर गुजरात में घमासान




Thursday, August 18, 2022

भगवान श्री कृष्ण16 कलाओं से परिपूर्ण पूर्णावतार 



भगवान श्रीकृष्ण पहले संपूर्ण 16 कलाओं से परिपूर्ण अवतार माने जाते हैं. वहीं पौराणिक मान्यता है कि श्रीराम सूर्यवंश में अवतरित हुए थे. सूर्य की बारह कलाएं होती हैं, इसलिए वे बारह कलाओं से परिपूर्ण माने गए. वहीं कृष्णजी चंद्रवंश में पैदा हुए थे और चंद्र आकाश को सोलह कलाओं में बांटते हैं, इसलिए कृष्णजी सोलहकलाओं से पूर्ण माने जाते हैं. जैसे भगवान राम को 12 कलाओं  ज्ञान था। साधारण मनुष्य में पांच कलाएं और श्रेष्ठ मनुष्य में आठ कलाएं होती हैं। 

भगवान कृष्ण की 16 कलाएँ



श्री संपदा – 

जिसके पास भी श्रीकला या संपदा होगी वह धनी होगा। धनी होने का अर्थ सिर्फ पैसा व पूंजी जोड़ने से नहीं है बल्कि मन, वचन व कर्म से धनी होना चाहिए। यदि कोई आस लेकर ऐसे व्यक्ति के पास आता है, तो वह उसे निराश नहीं लौटने देता। श्री संपदा युक्त व्यक्ति के पास मां लक्ष्मी का स्थायी निवास होता है। इस कला से संपन्न व्यक्ति समृद्धशाली जीवनयापन करता है।

भू संपदा – 

इसका अर्थ है कि इस कला से युक्त व्यक्ति बड़े भू-भाग का स्वामी हो, या किसी बड़े भू-भाग पर आधिपत्य अर्थात राज करने की क्षमता रखता हो।

कीर्ति संपदा – 

कीर्ति यानि की ख्याति, प्रसिद्धि अर्थात जो देश दुनिया में प्रसिद्ध हो। लोगों के बीच लोकप्रिय हो और विश्वसनीय माना जाता हो। जन कल्याण कार्यों में पहल करने में हमेशा आगे रहता हो।

वाणी सम्मोहन – 

कुछ लोगों की आवाज में सम्मोहन होता है। लोग न चाहकर भी उनके बोलने के अंदाज की तारीफ करते हैं। ऐसे लोग वाणी कला युक्त होते हैं, इन पर मां सरस्वती की विशेष कृपा होती है। इन्हें सुनकर क्रोध शांत हो जाता है और मन में भक्ति व प्रेम की भावना जागती है।

लीला – 

इस कला से युक्त व्यक्ति चमत्कारी होता है और उसके दर्शनों से ही एक अलग आनंद मिलता है। श्री हरि की कृपा से कुछ खास शक्ति इन्हें मिलती हैं जो कभी कभी अनहोनी को होनी और होनी को अनहोनी करने के साक्षात दर्शन करवाते हैं। ऐसे व्यक्ति जीवन को भगवान का दिया प्रसाद समझकर ही उसे ग्रहण करते हैं।

कांति – 

कांति वह कला है जिससे चेहरे पर एक अलग नूर पैदा होता है, जिससे देखने मात्र से आप सुध-बुध खोकर उसके हो जाते हैं। यानि उनके रूप सौंदर्य से आप प्रभावित होते हैं और उनकी आभा से हटने का मन ही नहीं लेता है।

विद्या – 

विद्या भी एक कला है, जिसके पास विद्या होती है उसमें अनेक गुण अपने आप आ जाते हैं। विद्या से संपन्न व्यक्ति वेदों का ज्ञाता, संगीत व कला का मर्मज्ञ, युद्ध कला में पारंगत, राजनीति व कूटनीति में माहिर होता है।

विमला – 

विमल यानि छल-कपट, भेदभाव से रहित निष्पक्ष जिसके मन में किसी भी प्रकार मैल ना हो कोई दोष न हो, जो आचार विचार और व्यवहार से निर्मल हो ऐसे व्यक्तित्व का धनी ही विमला कला युक्त हो सकता है।

उत्कर्षिणि शक्ति – 

उत्कर्षिणि का अर्थ है प्रेरित करने क्षमता, जो लोगों को अकर्मण्यता से कर्मण्यता का संदेश दे सकें। जो लोगों को उनका लक्ष्य पाने के लिए प्रोत्साहित कर सके। किसी विशेष लक्ष्य को भेदने के लिये उचित मार्गदर्शन कर उसे वह लक्ष्य हासिल करने के लिये प्रेरित कर सके जिस प्रकार भगवान श्री कृष्ण ने युद्धभूमि में हथियार डाल चुके अर्जुन को गीतोपदेश से प्रेरित किया।

नीर-क्षीर विवेक – 

ऐसा ज्ञान रखने वाला व्यक्ति जो अपने ज्ञान से न्यायोचित फैसले लेता है। ऐसा व्यक्ति विवेकशील तो होता ही है साथ ही वह अपने विवेक से लोगों को सही मार्ग सुझाने में भी सक्षम होता है।

कर्मण्यता – 

जिस प्रकार उत्कर्षिणी कला युक्त व्यक्ति दूसरों को अकर्मण्यता से कर्मण्यता के मार्ग पर चलने का उपदेश देता है व लोगों को लक्ष्य प्राप्ति के लिये कर्म करने के लिये प्रेरित करता है वहीं इस गुण वाला व्यक्ति सिर्फ उपदेश देने में ही नहीं बल्कि स्वयं भी कर्मठ होता है। इस तरह के व्यक्ति खाली दूसरों को कर्म करने का उपदेश नहीं देते बल्कि स्वयं भी कर्म के सिद्धांत पर ही चलते हैं।

योगशक्ति – 

योग भी एक कला है। योग का साधारण शब्दों में अर्थ है जोड़ना यहां पर इसका आध्यात्मिक अर्थ आत्मा को परमात्मा से जोड़ने के लिये भी है। ऐसे व्यक्ति बेहद आकर्षक होते हैं और अपनी इस कला से ही वे दूसरों के मन पर राज करते हैं।

विनय – 

इसका अभिप्राय है विनयशीलता यानि जिसे अहं का भाव छूता भी न हो। जिसके पास चाहे कितना ही ज्ञान हो, चाहे वह कितना भी धनवान हो, बलवान हो मगर अहंकार उसके पास न फटके। शालीनता से व्यवहार करने वाला व्यक्ति इस कला में पारंगत हो सकता है।

सत्य धारणा – 

विरले ही होते हैं जो सत्य का मार्ग अपनाते हैं और किसी भी प्रकार की कठिन से कठिन परिस्थितियों में भी सत्य का दामन नहीं छोड़ते। इस कला से संपन्न व्यक्तियों को सत्यवादी कहा जाता है। लोक कल्याण व सांस्कृतिक उत्थान के लिए ये कटु से कटु सत्य भी सबके सामने रखते हैं।

आधिपत्य – 

आधिपत्य का तात्पर्य जोर जबरदस्ती से किसी पर अपना अधिकार जमाने से नहीं है बल्कि एक ऐसा गुण है जिसमें व्यक्ति का व्यक्तित्व ही ऐसा प्रभावशाली होता है कि लोग स्वयं उसका आधिपत्य स्वीकार कर लेते हैं। क्योंकि उन्हें उसके आधिपत्य में सरंक्षण का अहसास व सुरक्षा का विश्वास होता है।

अनुग्रह क्षमता – 

जिसमें अनुग्रह की क्षमता होती है वह हमेशा दूसरों के कल्याण में लगा रहता है, परोपकार के कार्यों को करता रहता है। उनके पास जो भी सहायता के लिये पंहुचता वह अपने सामर्थ्यानुसार उक्त व्यक्ति की सहायता भी करते हैं।

जिन लोगों में भी ये सभी कलाएं अथवा इस तरह के गुण होते हैं वे ईश्वर की तरह ही होते हैं। हालांकि, किसी इंसान में इन सभी गुणों का एक साथ मिलना असंभव है। ये सभी गुण केवल द्वापर युग में भगवान श्री कृष्ण के अवतार रूप में ही मिलते हैं। जिसके कारण यह उन्हें पूर्णावतार और इन सोलह कलाओं का स्वामी कहते हैं।



Sunday, July 10, 2022




देवशयनी एकादशी का महत्व 


आज से देवता चार माह तक विश्राम करेंगे

आज से देवता चार माह तक विश्राम करेंगे।इसका यह अर्थ कदापि नहीं कि देवता सो जायेंगे।धर्म प्रधान समाज होने के कारण भारत में विज्ञान को भी धर्म के आधार पर ही समझाया गया है। यह विज्ञान से जुड़ा हुआ ही तथ्य है।

पंच तत्व में ही देवता है 

वास्तव में तो पंचतत्व (पृथ्वी, अग्नि,जल ,वायु और आकाश) में ही सम्पूर्ण देवता निहित है।वर्षा ऋतु प्रारम्भ होते ही ये पाँचों तत्व अपना स्वभाव बदल लेते हैं।पृथ्वी पर अनेक प्रकार की वनस्पतियां उग आती है।जगह-जगह पानी भर जाने से मार्ग अवरुद्ध हो जाते हैं।विभिन्न प्रकार के रेंगने वाले जहरीले जीव बिलों में पानी भर जाने से सतह पर आ जाते हैं।अग्नि मन्द पड़ जाती है। खुले में हवन आदि शुभ धार्मिक कार्य करना कठिन हो जाता है।वर्षा जल मिल जाने से अधिकांश जल दूषित हो जाता है तथा हवा में भी लगभग चालीस प्रतिशत पानी की मात्रा हो जाती है।आकाश में बादल छाये रहने के कारण धूप धरती तक नहीं पहुँच पाती है।

पाँचों प्रमुख देवता अपना स्वभाव बदल लेते

पाँचों प्रमुख देवता अपना स्वभाव बदल लेते हैं।अतः ऐसे समय कोई सामजिक (विवाह आदि) अथवा मांगलिक कार्य करने में अनेक संकटों का सामना करना पड़ेगा और हमारा शरीर भी तो इन पाँच तत्वों से मिलकर ही बना है इसलिये जो प्रभाव बाहर है वही हमारे शरीर के अंदर होंगे।अगर बाहर मन्दाग्नि है तो हमारे शरीर की भी अग्नि (पाचन क्षमता) कमजोर पड़ जाती है। 

हमारे पूर्वजों का विज्ञान

इन सब बातों का ध्यान करके हमारे पूर्वजों ने देवशयनी ग्यारस से लेकर देवउठनी ग्यारस (शरद ऋतु) तक को चातुर्मास का रूप देते हुए देवता विश्राम काल मानते हुए लम्बी यात्राओं, सामाजिक तथा विशेष मांगलिक कार्यक्रमों पर धार्मिक रोक लगा दी।समुद्र में इस समय मछलियाँ पकड़ने पर भी रोक रहती है,क्योंकि यह जलीय जीवों का प्रजनन काल रहता है।धर्मप्रधान समाज होने से उसने यह मन से स्वीकार कर लिया और एक स्थान पर रहते हुए अपना व्यावसायिक कर्म के साथ व्यक्तिगत धार्मिक उपासना को प्राथमिकता दी। गाँव-गाँव में मंदिरों-चौपालों पर सावन-भादौ में रामचरित मानस या अन्य धार्मिक ग्रंथों का वाचन होता है ।

यही विज्ञान है

इसलिये आईये हम सब अपने धर्म का पालन करें । यही विज्ञान है।इन सोये हुए देवताओं की रखवाली करना हम सब का सामाजिक और नैतिक दायित्व है।किन्तु आज पहले जैसी परिस्थिति नहीं हैं।लोगों के व्यवसाय भी ऐसे हो गये हैं कि यात्राएँ करना ही पड़ती है।किन्तु फिर भी जितना हो सके हम इन पंचतत्वों की रक्षा का इस समय कोई न कोई संकल्प लें।पौधे लगायें, पानी रोकें, नदियों,पहाड़ों, जलस्रोतों,जंगल की रक्षा करें। धरती,जल,आकाश, वायु को प्रदूषित होनें से बचायें।यही सोये हुए देवताओं की रक्षा करना है ।


Friday, July 8, 2022



जानिए नाभि का रहस्य...नाभी में तेल लगाने के चमत्कारी फायदे 


पैदा होने के बाद जब मां की नाल से जुड़ी बच्चे की गर्भनाल हो डॉक्टर्स द्वारा बांधकर अलग किया जाता है तो बच्चे के पेट पर एक निशान बन जाता है जिसे नाभि बोलते हैं। नाभि का आकार और संरचना सभी में अलग-अलग होती है। महिलाओं की तुलना में पुरुषों की नाभि के आसपास अधिक रोएं होते हैं। नाभि सिर्फ स्तनधारी जीवों में पाई जाती है, अंडे देने वाले जीवों में नहीं।

यह सूर्य से संबंधित केंद्र है, जो पाचन की प्राणमयी क्रिया एवं भोजन के शरीर में शोषण की गतिविधियों को नियंत्रित करता है। इस तरह मणिपूरक चक्र ताप एवं शक्ति का केंद्र है। शरीर के संतुलन को सही बनाए रखने के साथ अंग प्रत्यंगों में सामंजस्य एवं नाड़ियों के कार्य-संचालन व नियंत्रण में नाभि मंडल की भूमिका महत्वपूर्ण है।




नाभि के रहस्य 


1. हिन्दू शास्त्रों के अनुसार नाभि हमारी जीवन ऊर्जा का केंद्र है। कहते हैं कि मृत्यु के बाद भी प्राण नाभि में 6 मिनट तक रहते हैं। शरीर में दिमाग से भी महत्वपूर्ण स्थान है नाभि का। नाभि शरीर का प्रथम दिमाग होता है, जो प्राणवायु से संचालित होता है।

2. हमारा सूक्ष्म शरीर नाभि ऊर्जा के केंद्र से जुड़ा रहता है। यदि कोई संत या सिद्धपुरुष शरीर से बाहर निकलकर सूक्ष्म शरीर से कहीं भी विचरण करता रहता है, तो उसके सूक्ष्म शरीर की नाभि से स्थूल शरीर की नाभि के बीच एक रश्मि जुड़ी रहती है। यदि यह टूट जाती है तो व्यक्ति का अपने स्थूल शरीर से संबंध भी टूट जाता है।




नाभि में तेल लगाने के फायदे

नाभि शरीर का केंद्र बिंदु होता है। हर रात सोने से पहले अगर आप मात्र दो बूंद तेल भी नाभि में डालते हैं तो सेहत के कई आश्चर्यजनक फायदे मिल सकते हैं। यह त्वचा, प्रजनन, आंखों और मस्तिष्क के लिए अत्यंत उपयोगी है। आइए जानते हैं नाभि में तेल डालने से क्या और कौन से फायदे मिलते हैं...

पाचन क्षमता बढ़ाती है

सरसों के तेल की कुछ बूंदों से नाभि (बेली बटन) की मालिश करने से आंत्र सिंड्रोम (बॉवेल सिंड्रोम) को दूर करने में मदद मिलती है। यह आंत के स्वास्थ्य दुरुस्‍त करता है और पेट की ख़राबी, पेट फूलना या कब्ज जैसे अन्य पाचन संबंधी मुद्दों को कम कर करता है। नेवल ऑयल थेरेपी में नाभि तेल आपके पाचन तंत्र के लिए रामबाण है। अगर आप रोजाना अपनी नाभि के किनारों के आसपास सरसों के तेल से मालिश करेंगे तो लीवर में प्लीहा से गैस्ट्रिक और पित्त के रस (बेली जूस) जैसे हानिकारक चीजों से छुटकारा मिलेगा। जिससे पाचन में सुधार होगा। मतली और आंत में दर्द से राहत पाने के लिए, आप नाभि पर पुदीना या अदरक का तेल भी लगा सकती हैं।

आपके मन को शांत करती है

हाथो से नाभि के चारों ओर पेट पर एक गोलाकार (गोल आकृति) बनाते हुए मालिश करने से तनाव कम करने और आराम करने में मदद मिलेगी। पैरासिम्पेथेटिक तंत्रिका तंत्र को सक्रिय करने में, नाभि चिकित्सा आपकी भावनाओं को संतुलित करने में और एकाग्रता बढ़ाने में मदद करती है। तनाव कम करने के लिए आप लैवेंडर ऑयल का उपयोग भी कर सकती हैं। इससे मानसिक स्‍वास्‍थ्‍य बेहतर होता है।

त्वचा में एक प्राकृतिक चमक लाती है

एक चिकनी, स्पष्ट और चमकदार त्‍वचा के लिए, हर दिन जैतून के तेल से नाभि (बेली बटन) की मालिश करें। प्राकृतिक फैटी एसिड और एंटीऑक्सीडेंट के साथ समृद्ध, जैतून का तेल सूजन को कम करने, त्वचा की समस्याओं को रोकने, त्वचा के संक्रमण को ठीक करने और सिर से पैर तक त्वचा को मॉइस्चराइज करने में मदद करता है। इसमें होंठ और एड़ी भी शामिल हैं।

बालों के विकास को बढ़ाती है

नाभि (बेली बटन), शरीर के अंदर 72,000 नसों से जुड़ी हुई है। ये शरीर को उन खनिजों को अवशोषित करने में मदद करती है, जो स्वस्थ बालों के विकास और वोल्‍यूम के लिए जिम्मेदार होते हैं। बालों को ग्रे करने के लिए जिम्मेदार नसों को पोषण प्रदान करता है। जिससे समय से पहले होने वाले ग्रेइंग को रोकने में मदद मिलती है। इससे बालों की जड़ें मजबूत होती हैं।

प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार करती है

आयुर्वेदिक विशेषज्ञ, श्रेयांश जैन कहते है कि “एसेंशियल ऑयल के साथ नाभि (बेली बटन) की मालिश करने से पुरुषों और महिलाओं दोनों के प्रजनन स्वास्थ्य में सुधार होता है

जोड़ों के दर्द से राहत दिलाती है

मांसपेशियों में सूजन होने से जोड़ों में दर्द हो सकता है। नाभि चिकित्सा के लिए अरंडी के तेल, दौनी के तेल का उपयोग करने से दर्द में कमी, जोड़ों में मजबूती और लचीलापन आता है। अगर आप गठिए के प्रारंभिक स्तर में हैं या आपकी हड्डियां कमजोर हैं, तो आपके लिए नाभि चिकित्सा एक अच्छा विकल्प है राहत पाने के लिए।

सूखी (ड्राई) आंखों के सिंड्रोम में सुधार करती है

प्रदूषण, बहुत ज्यादा पढ़ाई करने, स्क्रीन देखने, धूम्रपान करने, उम्र बढ़ने, या किसी अन्य चिकित्सा स्थिति के कारण आंखें ड्राई हो जाती हैं। जो आपकी दृष्टि में बाधा डाल सकती हैं और परिणामस्वरूप आंखों में जलन हो सकती है।


Tuesday, June 28, 2022


 

                Nine Tips to Stay Fit

Staying fit and healthy plays an important role in our life. People neglect their health because of the hectic daily schedules but there are little things that you can do each day that will add to being healthy and fit.

Important numbers to remember :

1. Blood pressure : 120 / 80

2. Pulse                   : 70 - 100

3. Temperature     : 36.8 - 37

4. Respiration        : 12-16

                        Males     (13.50-18)

                        Females ( 11.50 - 16) 

6. Cholesterol        : 130 - 200

7. Potassium          : 3.50 - 5

8. Sodium                : 135 - 145

9. Triglycerides      : 220

10. Amount of blood in the body : 

                            Pcv 30-40%

11. Sugar             

              Children     : 70-130

              Adults        : 70 - 115

12. Iron                    : 8-15 mg

13. WBC                   : 4000 - 11000

14. Platelets           : 150,000 - 400,000

15. RBC                     : 4.50 - 6 million

16. Calcium              : 8.6 - 10.3 mg/dL

17. Vitamin D3        : 20 - 50 ng/ml

                                  (nanograms/ml)

18. Vitamin B12       : 200 - 900 pg/ml


  Tips for fitness:- 


 First Tip:

 Always drink water even if you don't feel thirsty!!

 The biggest health problem  is from the lack of water in the body!

2 litres Minimum per day (24 hours) 



Second Tip:

 Play sports even when you are very busy!

The body must be moved, even if only by walking or swimming or any kind of sport!.🚶 

Walking is good for a start!👌




 Third Tip:

Reduce food!

Leave excessive food cravings  because it never does good!

Don't deprive yourself  but reduce the quantity!

 Use more of Protein & Carbohydrates based foods. 


 Fourth Tip

 As much as possible, do not use the car unless absolutely necessary! Try to reach on foot for what you want (grocery, visiting someone or any goal)!  Climb stairs instead of  using an elevator/ escalator. 



Fifth Tip

 Let go of Anger!!

 Let go of worry!!

Try to overlook things...

 

Do not involve yourself in situations of disturbances! They all diminish health and take away the splendor of the soul. Talk to people who are positive and listen 👂 


Sixth Tip

 As it is said....'leave your money in the Sun  and sit in the shade'!!

Don't limit yourself and those around you.

Money was made to live by it, not to live for it.



Seventh Tip

 Don't make yourself feel sorry for anyone nor on something you could not achieve, 

nor anything that you could not own!

 Ignore it, forget it!🤔



Eighth Tip

Humility! Money, Prestige, Power and Influence  are all things that are corrupted by arrogance!

 Humility is what brings people closer to you with love.!☺ 


Ninth Tip

If your hair turns grey, this does not mean the end of life! It is a proof that a better life has begun! 🙋

 Be optimistic, travel, enjoy yourself!  Make memories!